कर्नाटक में नेतृत्व बदलने की अटकलें तेज: सिद्धारमैया कल दे सकते हैं इस्तीफा, डीके शिवकुमार बन सकते हैं CM

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार को इस्तीफा दे सकते हैं और कांग्रेस हाईकमान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री बना सकता है।

May 27, 2026 - 10:55
कर्नाटक में नेतृत्व बदलने की अटकलें तेज: सिद्धारमैया कल दे सकते हैं इस्तीफा, डीके शिवकुमार बन सकते हैं CM

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। कांग्रेस पार्टी उनकी जगह उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है। इस संभावित बदलाव को लेकर मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच करीब छह घंटे तक अहम बैठक हुई।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से मुख्यमंत्री पद छोड़ने का आग्रह किया और उन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने का प्रस्ताव रखा। बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक में नई रणनीति पर काम कर रहा है।

गुरुवार को हो सकती है बड़ी घोषणा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धारमैया ने कुछ करीबी समर्थकों और विधायकों से चर्चा के बाद संकेत दिए हैं कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे। उन्होंने गुरुवार सुबह मंत्रियों की एक ब्रेकफास्ट मीटिंग भी बुलाई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद वे इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।

हालांकि कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को अटकल बताते हुए कहा कि दिल्ली बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी किसी चर्चा में सच्चाई नहीं है।

एक साल से जारी है CM पद को लेकर खींचतान

दरअसल, कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले एक साल से अंदरूनी खींचतान चल रही है। डीके शिवकुमार समर्थक लगातार दावा करते रहे हैं कि 2023 में सरकार बनने के समय ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद का फॉर्मूला तय हुआ था। हालांकि सिद्धारमैया खेमे ने हमेशा इस दावे को खारिज किया।

20 नवंबर 2025 को कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद से यह विवाद और ज्यादा खुलकर सामने आने लगा। कई विधायक दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले थे और नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाई थी।

सिद्धारमैया ने पहले इस्तीफे से किया था इनकार

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से साफ कहा था कि अगर उन्हें हटाया गया तो पार्टी में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वे डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे।

कांग्रेस नेतृत्व इस बदलाव को बेहद सावधानी से करना चाहता है, क्योंकि सिद्धारमैया राज्य में पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे माने जाते हैं। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन से किसी तरह की बगावत या राजनीतिक नुकसान हो।

बेटे को मंत्री बनाने का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने बिहार में भाजपा द्वारा अपनाए गए राजनीतिक मॉडल की तर्ज पर सिद्धारमैया के बेटे को मंत्री पद देने का प्रस्ताव भी रखा है। माना जा रहा है कि इससे सिद्धारमैया खेमे को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए समय मांगा है।

प्रियंका गांधी भी बदलाव के पक्ष में

सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा भी कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में हैं। पार्टी का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले नया चेहरा लाकर सत्ता विरोधी माहौल को कम किया जा सकता है। उस समय तक सिद्धारमैया की उम्र करीब 80 साल हो जाएगी, इसलिए कांग्रेस अब भविष्य की रणनीति पर काम कर रही है।

दिल्ली दौरे ने बढ़ाईं अटकलें

सोमवार रात दिल्ली पहुंचने के बाद सिद्धारमैया ने कहा था कि उन्हें हाईकमान ने बुलाया है और बैठक का एजेंडा उन्हें नहीं बताया गया। वहीं डीके शिवकुमार ने भी कहा था कि कुछ परिस्थितियों में दिल्ली जाना जरूरी हो जाता है।

दोनों नेताओं के एक साथ दिल्ली पहुंचने और फिर लंबी बैठक होने के बाद कर्नाटक में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं बयानबाजी

नवंबर 2025 में डीके शिवकुमार ने कहा था कि वे हमेशा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नहीं रह सकते और पार्टी में अन्य नेताओं को भी मौका मिलना चाहिए। वहीं दिसंबर 2025 में सिद्धारमैया ने कहा था कि जब हाईकमान फैसला करेगा, तब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन जाएंगे।

हालांकि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से हमेशा एकजुट होकर सरकार चलाने की बात कही, लेकिन पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान लगातार सुर्खियों में बनी रही।

अब सभी की नजर गुरुवार को होने वाली बैठक और संभावित राजनीतिक फैसले पर टिकी हुई है। अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जाएगा।

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