ड्रग्स के धंधे से 25 करोड़ की प्रॉपर्टी खड़ी की: MD ड्रग्स मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई की गिरफ्तारी और चौंकाने वाले खुलासे

राजस्थान के टॉप-10 मोस्ट वांटेड अपराधियों में शामिल MD ड्रग्स (मेफेड्रोन) का मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई उर्फ अनिल/रामलाल को ANTF और ATS की टीम ने कोलकाता से गिरफ्तार किया। जेल में गुरु से फॉर्मूला सीखकर उसने पश्चिमी राजस्थान में दर्जनभर फैक्ट्रियां चलाईं, गूगल से सुनसान लोकेशन ढूंढी, 1.50 लाख मासिक किराया देकर कमरे लिए और डेढ़ साल में 25 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाई। वह हर 10 दिन में सिम बदलता था, एयर ट्रैवल करता था और पत्नी से रोज बात करता था। उसके खिलाफ 36 केस दर्ज हैं।

Jan 19, 2026 - 11:29
ड्रग्स के धंधे से 25 करोड़ की प्रॉपर्टी खड़ी की: MD ड्रग्स मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई की गिरफ्तारी और चौंकाने वाले खुलासे

राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़े ऑपरेशन में MD ड्रग्स (मेफेड्रोन) के प्रमुख मास्टरमाइंड को दबोच लिया है। यह व्यक्ति राजस्थान के टॉप-10 मोस्ट वांटेड अपराधियों में शामिल था और पिछले 8 साल से पुलिस की गिरफ्त से दूर था। आरोपी का नाम रमेश कुमार विश्नोई उर्फ अनिल उर्फ रामलाल (31 वर्ष) है, जो बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना का निवासी है। ANTF और ATS की संयुक्त टीम ने जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से उसे गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।रमेश के खिलाफ राजस्थान सहित गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में कुल 36 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह 12वीं फेल है, लेकिन जेल में रहते हुए MD ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला सीखकर बड़ा ड्रग माफिया बन गया। गिरफ्तारी के बाद ANTF की पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

जेल में गुरु से सीखा फॉर्मूला, फिर खुद बना मालिक

पूछताछ में रमेश ने बताया कि महाराष्ट्र की जेल में बंद एक डॉक्टर (जिसे वह 'गुरु डॉ. बीरजू' कहता है) से उसने MD ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला सीखा। पहले वह गुरु के लिए सप्लाई करता था और गुजरात-महाराष्ट्र से MD ड्रग्स लेकर राजस्थान में बेचता था। लेकिन कम प्रॉफिट और ज्यादा रिस्क के कारण उसने खुद फैक्ट्री शुरू करने का फैसला किया।लगभग डेढ़ साल पहले गुरु ने फॉर्मूला शेयर किया और 'गुरु दक्षिणा' के रूप में पार्टनरशिप दी। गुरु ने एक केमिस्ट भी मदद के लिए भेजा। इसके बाद रमेश ने पश्चिमी राजस्थान में दर्जनभर से ज्यादा छोटी-छोटी फैक्ट्रियां शुरू कीं।

गूगल से ढूंढता था खुफिया लोकेशन, 1.50 लाख तक किराया देता

MD ड्रग्स बनाने के लिए रमेश सुनसान और थाने से दूर जगहों की तलाश करता था। वह गूगल पर खाली पड़ी जमीनों या बड़े कमरों की तस्वीरें देखता और फिर वहां पहुंचकर जांच करता। खुद को केमिकल बिजनेसमैन बताकर मकान मालिक से मिलता और दो महीने रिसर्च के बहाने कमरा किराए पर लेता।खास बात यह कि वह 1.50 लाख रुपये प्रति महीना तक किराया देने का लालच देता था। ऐसी जगह पर वह 40-50 किलोग्राम MD ड्रग्स बनाता और काम पूरा होने पर दो महीने बाद फैक्ट्री बंद करके चला जाता, ताकि किसी को शक न हो। बिजली की सुविधा और शोर-शराबे से दूर रहना उसकी मुख्य शर्त होती थी।

प्रॉफिट का खेल: 1 लाख खर्च, 29 लाख कमाई

एक किलो MD ड्रग्स बनाने में लगभग 1 लाख रुपये का खर्च आता था, लेकिन बाजार में इसे 29-30 लाख रुपये में बेचा जाता था। एक बार में 10 किलो तक बनाया जाता था और पूरा प्लांट ट्रक के डिब्बे जितनी जगह में लग जाता था। डेढ़ साल में दर्जनभर फैक्ट्रियों से करोड़ों की कमाई की।इस कमाई से उसने अपने गांव में मकान बनवाया, दो ट्यूबवेल लगवाए, लोगों का कर्ज चुकाया और लग्जरी लाइफस्टाइल अपनाई। कुल मिलाकर उसने 25 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खड़ी की, जिसमें मकान, फार्म हाउस, दुकानें और मार्बल फैक्ट्री शामिल हैं।

पकड़े जाने से बचने के तरीके

हर 10 दिन में मोबाइल और सिम बदल देता था।पत्नी से रोज बात करता था, लेकिन दावा करता था कि कोई एजेंसी उसे ट्रैक नहीं कर सकती।रोड ट्रैवल से बचने के लिए हमेशा एयर ट्रैवल करता था।कोलकाता में किराए के फ्लैट में रहकर खुद को केमिकल बिजनेसमैन और केमिस्ट्री टीचर बताता था। वहां नया बैन बिजनेस शुरू करने की तैयारी में था।

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि MD ड्रग्स का बाजार इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि केमिकल आसानी से मिल जाते हैं और प्रक्रिया सरल है। रमेश की गिरफ्तारी से पश्चिमी राजस्थान में कई फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ होने की उम्मीद है। उसे बाड़मेर लाकर कोर्ट में पेश किया गया और आगे की जांच जारी है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.