रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद ‘बड़ी मछली’ जाल में… 960 करोड़ के घोटाले में दिल्ली से दबोचा गया पूर्व IAS, अब खुलेंगे कई राज!
960 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार किया। अब रिमांड के दौरान कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। 1988 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी को एसीबी टीम ने गुरुवार को दिल्ली से पकड़ा, जिसके बाद शुक्रवार को जयपुर स्थित एसीबी कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट परिसर में भारी हलचल के बीच जब मीडिया ने उनसे सवाल पूछे, तो उन्होंने केवल इतना कहा—“मेरे वकील आपको सब बताएँगे।” उनके इस जवाब ने मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया है।
कोर्ट में पेशी और रिमांड की तैयारी
शुक्रवार को सुबोध अग्रवाल को जयपुर के मिनी सचिवालय स्थित एसीबी कोर्ट की पांचवीं मंजिल पर पेश किया गया। पेशी से पहले उन्हें एक अलग कमरे में बैठाया गया। एसीबी अब कोर्ट से उनकी अधिकतम पुलिस रिमांड की मांग करेगी, ताकि घोटाले की गहराई से जांच की जा सके।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की रकम किन-किन तक पहुंची और इस पूरे खेल में कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं।
दिल्ली से जयपुर तक ‘ऑपरेशन सुबोध’
सुबोध अग्रवाल लंबे समय से इस मामले में फरार चल रहे थे। उनके खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका था और फरवरी 2024 में लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया था।
एसीबी टीम ने उनकी लोकेशन ट्रैक कर दिल्ली से उन्हें गिरफ्तार किया। यह पूरी कार्रवाई एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में अंजाम दी गई।
क्या है 960 करोड़ का JJM घोटाला?
यह घोटाला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है।
जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं:
- फर्जी सर्टिफिकेट का खेल:
मैसर्स गणपति ट्यूबवैल और मैसर्स श्याम ट्यूबवैल नामक फर्मों ने IRCON इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर करोड़ों के टेंडर हासिल किए। - अधिकारियों की मिलीभगत:
आरोप है कि उच्च अधिकारियों को इन फर्जी दस्तावेजों की जानकारी थी, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं की गई और चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाया गया। - निरीक्षण में भारी लापरवाही:
नियमों के अनुसार बड़े टेंडर में साइट निरीक्षण जरूरी था, लेकिन अधिकारियों ने दफ्तर में बैठकर ही फाइलों को मंजूरी दे दी।
पहले भी हो चुकी बड़ी कार्रवाई
एसीबी ने इस घोटाले की जांच 2024 में शुरू की थी। 17 फरवरी को राजस्थान समेत दिल्ली, बिहार और झारखंड के 15 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
इस दौरान जलदाय विभाग के 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। सुबोध अग्रवाल इस मामले में 10वें आरोपी हैं, जबकि 3 अन्य अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
‘पावरफुल IAS’ का विवादित अंत
सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाते थे। वे 31 दिसंबर 2025 को ही सेवानिवृत्त हुए थे।
रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद उनकी गिरफ्तारी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ में कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और इस घोटाले की परतें कितनी गहरी हैं।