अस्पताल के खाने में दिखा ऐसा नज़ारा…इलाज के नाम पर जहर? मरीजों का फूटा गुस्सा!

राजस्थान के अलवर स्थित राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में मरीजों को दी गई खिचड़ी में कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया। मरीजों और परिजनों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए विरोध जताया। मामले पर संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

Apr 7, 2026 - 12:59
Apr 7, 2026 - 13:00
अस्पताल के खाने में दिखा ऐसा नज़ारा…इलाज के नाम पर जहर? मरीजों का फूटा गुस्सा!

“कहते हैं अस्पताल वो जगह होती है जहां जिंदगी बचाई जाती है, लेकिन अगर वहीं से खतरा मिलने लगे तो क्या होगा… और जब इलाज के नाम पर जहर परोसा जाए, तो भरोसा किस पर किया जाए?”

खिचड़ी में लंबे-लंबे कीड़े
राजस्थान के अलवर से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां स्थित राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को परोसी जा रही खिचड़ी में लंबे-लंबे कीड़े मिलने का मामला सामने आया है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ माना जा रहा है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों में भारी आक्रोश
घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। जैसे ही खिचड़ी के पैकेट खोले गए, उसमें कीड़े रेंगते नजर आए। यह देखकर कई लोगों ने तुरंत खाना फेंक दिया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। क्योंकि सवाल सिर्फ खाने का नहीं है। “यह सवाल है उस भरोसे का जो लोग अस्पताल के नाम पर रखते हैं।” परिजनों का कहना है कि वे अपने मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराते हैं, लेकिन यहां दिया जा रहा भोजन ही उनकी सेहत के लिए खतरा बनता नजर आ रहा है। उनका आरोप है कि अगर कोई मरीज अनजाने में यह खाना खा लेता, तो उसकी हालत और बिगड़ सकती थी।

हरकत में आया अस्पताल प्रशासन 
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पीसी सैनी ने साफ शब्दों में कहा है कि मरीजों की सेहत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित स्टाफ को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि व्यवस्थाओं में तुरंत सुधार किया जाए और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल
लेकिन असली मुद्दा अब भी जस का तस खड़ा है—क्या हर बार जांच और आश्वासन ही समाधान होंगे, या फिर वाकई सिस्टम में कोई ठोस बदलाव आएगा? आखिर कब तक मरीज अपनी बीमारी से ज्यादा अस्पताल की लापरवाही का जोखिम उठाते रहेंगे? यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत को सामने लाती है, जहां इलाज के साथ मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी भरोसे के दायरे में नहीं रह गई हैं।