भारत-नेपाल सीमा बयान से घिरे पीएम बालेन शाह: कुर्सी दिलाने वाले भी उतरे विरोध में, बढ़ा राजनीतिक संकट
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) के भारत-नेपाल सीमा विवाद पर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक विवाद भड़क गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से भी जाना जाता है, अपने हालिया बयान को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। भारत-नेपाल सीमा विवाद पर संसद में दिए गए उनके बयान के बाद देश के अंदर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
संसद में बालेन शाह का बयान
रविवार को नेपाल संसद में दिए गए संबोधन में पीएम बालेन शाह ने कहा कि जांच के बाद यह सामने आया है कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ क्षेत्रों में भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर ऐतिहासिक, सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की मदद से समाधान निकाला जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि इस विवाद के समाधान में चीन और ब्रिटेन जैसे देशों की भी भूमिका हो सकती है, जिससे विवाद और अधिक गहरा गया।
भारत का सख्त रुख
भारत ने इस बयान पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि किसी तीसरे देश की इसमें कोई भूमिका नहीं हो सकती।
भारत ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच लगभग 98% सीमा पहले ही चिन्हित की जा चुकी है, जबकि कुछ हिस्सों में तकनीकी और प्राकृतिक कारणों से अभी भी विवाद है।
संसद में हंगामा और कार्यवाही स्थगित
नेपाल की संसद में इस बयान के बाद भारी हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के बयान का विरोध करते हुए कार्यवाही बाधित कर दी।
- संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी
- निचले सदन को 8 जून तक स्थगित किया गया
- नेशनल असेंबली की कार्यवाही भी अस्थायी रूप से रोक दी गई
विपक्षी दलों ने मांग की कि पीएम अपने बयान को वापस लें और उसे संसद रिकॉर्ड से हटाया जाए।
सड़क पर विरोध प्रदर्शन
राजधानी काठमांडू सहित कई इलाकों में छात्रों और युवा संगठनों ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “संप्रभुता की रक्षा करें” जैसे नारे लगाए और पीएम के बयान को “राष्ट्र विरोधी” बताया।
नेपाली कांग्रेस से जुड़े युवा संगठन तरुण दल ने भी विरोध मार्च निकालकर इस बयान की कड़ी निंदा की।
सीमा विवाद की पृष्ठभूमि
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता है, जबकि भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है।
भारत-नेपाल संवाद और स्थिति
भारत ने स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच पहले से ही संयुक्त तंत्र मौजूद हैं। कुछ क्षेत्रों में नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण और प्राकृतिक बदलावों के कारण सीमांकन की चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जिन पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।