नागौर के लूणदा गांव में मकर संक्रांति की शाम हुआ खूनी हमला: पीड़ितों को खुलेआम धमकियां, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

नागौर के लूणदा गांव में मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026) की शाम पुराने रास्ते विवाद के चलते हुए खूनी हमले में तीन लोग गंभीर घायल, सिर पर कस्सी से 11 टांके, चेहरे पर सरिए से 7 टांके लगे। आरोपी घर में घुसकर लाठी-कस्सी से हमला कर पीड़ितों को मरा समझ भागे। पीड़ित परिवार आरोप लगाता है कि पुलिस ने बयान-मेडिकल में लापरवाही बरती, आरोपी अब भी गांव में घूमकर "अगली बार जिंदा नहीं छोड़ेंगे" की धमकियां दे रहे हैं।

Jan 19, 2026 - 11:46
नागौर के लूणदा गांव में मकर संक्रांति की शाम हुआ खूनी हमला: पीड़ितों को खुलेआम धमकियां, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

नागौर जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत लूणदा गांव में 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पुरानी रंजिश और रास्ते के विवाद ने भयावह हिंसक रूप धारण कर लिया। इस घटना में एक परिवार के तीन सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जो पिछले कई दिनों से जोधपुर के जेएलएन अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हमला इतना क्रूर था कि पीड़ितों को मरा हुआ समझकर आरोपी मौके से फरार हो गए थे। यदि समय पर चिकित्सा सहायता न मिलती, तो स्थिति और भी विकराल हो सकती थी।

हमले का वीभत्स विवरण

घटना के अनुसार, आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से पीड़ित परिवार के घर में घुसकर लोहे की सरियों, लाठियों और धारदार हथियारों जैसे कस्सी (कुल्हाड़ी जैसा हथियार) से ताबड़तोड़ हमला किया। हमले में बुजुर्ग दंपत्ति और उनकी बहू बुरी तरह घायल हो गए।एक बुजुर्ग व्यक्ति के सिर पर कस्सी से इतना गहरा वार किया गया कि सिर की हड्डी तक चोट पहुंच गई। उनके सिर में 11 टांके लगाए गए।बीच-बचाव करने आई बुजुर्ग महिला के सिर में गहरा घाव हुआ, जिसमें 6 टांके लगे।

एक अन्य बुजुर्ग महिला के चेहरे पर लोहे की सरिए से हमला किया गया, जिससे उनका ऊपरी होंठ और गाल गहराई तक कट गया। उन्हें 7 टांके लगे और जबड़े में भी गंभीर चोट आई।पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी उन्हें मृत समझकर भाग निकले थे। पड़ोसियों की चीख-पुकार सुनकर बीच-बचाव करने पर ही आरोपी वहां से फरार हुए।

पीड़ितों की स्थिति और पुलिस की लापरवाही के आरोप

घायल होने के बाद भी पीड़ित परिवार का दावा है कि पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। नियमानुसार, जानलेवा हमले की सूचना मिलते ही पुलिस को अस्पताल पहुंचकर घायलों के फर्द बयान दर्ज करने चाहिए थे और मेडिकल बोर्ड से जांच करानी चाहिए थी। लेकिन:अब तक 4 में से केवल 2 पीड़ितों के बयान ही दर्ज किए गए हैं।एक घायल महिला को खुद थक-हारकर रविवार को थाने पहुंचना पड़ा ताकि अपना बयान दर्ज करा सके।पुलिस ने न तो घायलों का मेडिकल परीक्षण करवाया और न ही कोई संबंधित रिपोर्ट प्रदान की।पीड़ित परिवार डर के साये में जी रहा है। नामजद आरोपी अभी भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार धमकियां दे रहे हैं। पीड़ितों के अनुसार, आरोपी कह रहे हैं:"पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, अगली बार तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे।"

आरोपी और विवाद की पृष्ठभूमि

पीड़ित पक्ष के दूधाराम प्रजापत ने बताया कि मुख्य आरोपी हैं:मूलाराम प्रजापत (ठेकेदार) पुत्र चीमाराम,मदनलाल पुत्र रामपाल,जेठाराम पुत्र रामपाल,छोटूराम पुत्र रामपाल,मूलाराम पुत्र सुखाराम,तथा अन्य महिलाएं और साथी।यह विवाद लंबे समय से चल रहा रास्ते के मुद्दे पर है, जो कोर्ट में लंबित है। आरोपियों ने पहले ही रास्ता साफ करने के लिए परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। इसी रंजिश के चलते मकर संक्रांति की शाम वे हथियारों से लैस होकर पीड़ित के घर पर धावा बोल दिया।

पुलिस की कार्रवाई

सदर थाने में पीड़ित महिला की रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न धाराओं (जानलेवा हमला, हत्या का प्रयास आदि) में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.