प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन दौरा: 75 वर्षों की राजनयिक साझेदारी को नई गतिNarendra Modi, Jordan Visit, India Jordan Relations, King Abdullah II, IMEC Corridor, India Middle East Europe Corridor, Indian Diplomacy, West Asia, Global South, Bilateral Visit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15–16 दिसंबर 2025 को जॉर्डन के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जो उनका पहला पूर्ण द्विपक्षीय दौरा है। यह यात्रा भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है। इस दौरान मोदी और किंग अब्दुल्ला द्वितीय के बीच द्विपक्षीय वार्ता, व्यापारिक सहयोग बढ़ाने, संयुक्त बिजनेस फोरम और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत-जॉर्डन व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। IMEC कॉरिडोर पर भी चर्चा संभावित है, जो भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप से जोड़ने वाला रणनीतिक प्रोजेक्ट है। यह दौरा पश्चिम एशिया और ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 दिसंबर 2025 को तीन देशों के महत्वपूर्ण दौरे की शुरुआत जॉर्डन से कर रहे हैं। यह उनका जॉर्डन का पहला पूर्ण द्विपक्षीय दौरा है, जो जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर हो रहा है। अम्मान में पहुंचने पर जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने उनका एयरपोर्ट पर स्वागत किया। यह दौरा भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। दोनों देशों के बीच 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, और यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई देने का महत्वपूर्ण मौका है।मोदी का यह दौरा दो दिवसीय है (15-16 दिसंबर)। इस दौरान वे किंग अब्दुल्ला द्वितीय से वन-ऑन-वन और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। दोनों नेता भारत-जॉर्डन व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस करेंगे, जिसमें एक संयुक्त बिजनेस फोरम को संबोधित करना भी शामिल है। इसके अलावा, क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान होगा। मोदी जॉर्डन में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे, जो करीब 18,000 लोगों का है और टेक्सटाइल, आईटी, हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों में योगदान दे रहा है।
भारत-जॉर्डन संबंधों की मजबूती भारत और जॉर्डन के बीच संबंध गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक हैं। जॉर्डन के शासक हाशिमी वंश से हैं, जो पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के सबसे करीबी वंशज माने जाते हैं। जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा की भूमिका महत्वपूर्ण है।आर्थिक रूप से, भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2023-24 में दोनों देशों के बीच करीब 26,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 13,000 करोड़ रुपये था। भारत जॉर्डन से रॉक फॉस्फेट और उर्वरकों का कच्चा माल आयात करता है—भारत के कुल रॉक फॉस्फेट आयात का करीब 40% जॉर्डन से आता है। वहीं, जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, रसायन, मीट और ऑटो पार्ट्स आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर (लगभग 45,000 करोड़ रुपये) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
IMEC कॉरिडोर: रणनीतिक महत्व इस दौरे में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर चर्चा संभावित है। 2023 G20 समिट में घोषित IMEC भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट है, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का विकल्प माना जाता है। इसमें भारत, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका शामिल हैं।IMEC में समुद्री और रेल मार्ग शामिल हैं। भारत से माल UAE या सऊदी अरब पहुंचेगा, फिर रेल से जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप जाएगा। कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 6,000 किमी है। सऊदी अरब में 1,200 किमी रेल पहले से तैयार है, लेकिन जॉर्डन से इजराइल तक का हिस्सा बाकी है। गाजा संघर्ष के बाद रुके इस प्रोजेक्ट को फिर से गति देने के लिए मोदी का दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, IMEC बनने से भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने में 40% समय और 30% लागत बच सकती है।
जॉर्डन की अनोखी स्थिति जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता 'नो ऑयल' देश है—यहां तेल के भंडार नहीं हैं, क्योंकि इसका भूभाग समुद्र तल से ऊपर है। फिर भी, यहां फॉस्फेट और पोटाश की प्रचुरता है, जो उर्वरकों के लिए महत्वपूर्ण हैं और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।मोदी का यह दौरा 2018 के ट्रांजिट विजिट के बाद पहला पूर्ण दौरा है। उस समय किंग अब्दुल्ला ने प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। अब यह यात्रा रिश्तों को और मजबूत करेगी। 16 दिसंबर को मोदी इथियोपिया जाएंगे, जहां अफ्रीकी संघ मुख्यालय है, और फिर ओमान। यह दौरा भारत की ग्लोबल साउथ और वेस्ट एशिया में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।