एक शेफ से शुरुआत कर आज राजस्थान की सामाजिक एकता की मिसाल बन रहे रॉयल
राजस्थान के जैसलमेर-सीकर के मेघराज सिंह रॉयल (MRS ग्रुप के संस्थापक) ने साधारण शेफ से 300 करोड़ के साम्राज्य तक का सफर तय किया। अब वे यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक एकता मंच चला रहे हैं। हाल ही में रामदेवरा के मारवाड़ महासम्मेलन में 36 कौमों को एक मंच पर लाकर उन्होंने जातिवाद, बेरोजगारी और पर्यावरण संरक्षण पर एकजुट होने का आह्वान किया।
मेघराज सिंह रॉयल: रेगिस्तान के साधारण शेफ से सामाजिक एकता के प्रणेता एक प्रेरणादायक सफर
जयपुर, 8 अप्रैल 2026 राजस्थान की मिट्टी से निकले एक साधारण व्यक्ति, जिन्होंने रेगिस्तान की चुनौतियों को पार कर करोड़ों रुपये के व्यवसायिक साम्राज्य का निर्माण किया, आज पूरे मारवाड़ और राजस्थान में सामाजिक एकता, भाईचारे और सामाजिक न्याय की आवाज बन चुके हैं। वे हैं मेघराज सिंह रॉयल (मेघराज सिंह शेखावत), MRS ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन, यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन (UGPF) के चेयरमैन तथा एक समर्पित समाजसेवी। हाल ही में रामदेवरा में आयोजित मारवाड़ महासम्मेलन (सामाजिक एकता मंच) में उन्होंने हजारों लोगों को संबोधित करते हुए जातिवाद, बेरोजगारी और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर एकजुट होने का आह्वान किया, जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक लहर पैदा कर दी है।
साधारण शुरुआत से सफलता की ऊंचाइयों तक
मेघराज सिंह रॉयल का जन्म 1958 में राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला के छोटे से गांव रॉयल में हुआ था। पिता श्री कल्याण सिंह जी उन्हें शिक्षक बनाना चाहते थे, लेकिन 1977 में शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा छूट जाने के बाद उन्होंने जयपुर के फूड एंड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट में होटल मैनेजमेंट कोर्स जॉइन कर लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने जयपुर के प्रसिद्ध राम बाग पैलेस और गवर्नर हाउस में शेफ के रूप में काम किया। विदेश (बहरीन) में भी अनुभव हासिल करने के बाद मात्र 1400 रुपये लेकर भारत लौटे।1986 में जैसलमेर में एक ऊंट की अस्थिर (camel stable) को रेस्तरां ट्रायो में बदलकर उन्होंने व्यवसाय की नींव रखी। 1992 में जैसलमेर का पहला पांच सितारा होटल गोरबंध पैलेस खोला। वित्तीय संकटों (7 करोड़ का कर्ज) के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। व्यवसाय को विविधता दी । आतिथ्य, खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, संगमरमर और शराब वितरण तक। आज MRS ग्रुप उनके नेतृत्व में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में सूर्यगढ़ जैसलमेर, बीकानेर के नरेंद्र भवन और लक्ष्मी निवास पैलेस शामिल हैं। उन्होंने ऐतिहासिक किलों और महलों को सांस्कृतिक केंद्रों में बदलने का काम भी किया है।
उनकी सफलता का राज?
लोकल लोगों को हितधारक (stakeholder) बनाना, कर्मचारियों की वफादारी और नैतिक व्यवसायिक प्रथाएं। उनके बेटे मानवेंद्र और राघवेंद्र अब इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
सामाजिक एकता की यात्रा:
UGPF और 'सामाजिक एकता मंच'व्यवसाय की सफलता के साथ-साथ मेघराज सिंह रॉयल 1989 से ही सार्वजनिक कल्याण से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन (UGPF) की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और विरासत संरक्षण है। साथ ही आई लव फाउंडेशन के माध्यम से जैसलमेर में वर्षा जल संचयन और ग्रामीण विकास के काम हो रहे हैं।हाल के वर्षों में वे सामाजिक एकता मंच के माध्यम से सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। 5 अप्रैल 2026 को जैसलमेर के पवित्र रामदेवरा में आयोजित मारवाड़ महासम्मेलन इसका ताजा उदाहरण था। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में 36 कौमों (समाजों) के हजारों लोग एक मंच पर जुटे। सर्वोदय कलश में सभी ने घरों से लाया जल डालकर जातिवाद के समूल नाश का संकल्प लिया। मेघराज सिंह रॉयल ने मंच से कहा:“बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। लाखों लोग मेरे साथ काम करके चले गए, लेकिन हर रोज कैसे पैसा दिया जाए? भूखे को सुबह खिलाओगे तो शाम को फिर भूख लग जाएगी। जातिवाद, बेरोजगारी और पर्यावरण , इन तीन मुद्दों पर समाज को एकजुट होना होगा। सोच बदलो, राजस्थान में कोई बेरोजगार नहीं रहेगा।”
उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी समाजों का योगदान एकता से ही संभव होता है। क्षत्रिय सम्मेलनों (जैसे अलवर के खेड़ली में) में भी वे “हम क्या थे और क्या हो गए” विषय पर बोलते हुए समाज से इतिहास से सीखने, सर्व समाज को साथ लेकर चलने, शिक्षा और संगठन पर जोर देते हैं। उनका mantra है “एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है, जो आने वाली पीढ़ी को मजबूती देगी।”सकारात्मक प्रभाव और भविष्य की दृष्टिमेघराज सिंह रॉयल की पहल केवल भाषण तक सीमित नहीं। UGPF के जरिए वे शिक्षा (IAS की तैयारी सहायता), खेल (तीरंदाजी उपकरण), स्वास्थ्य और पर्यावरण (वसुधा मेरी मां कार्यक्रम) पर ठोस काम कर रहे हैं। उन्होंने भामाशाह की भूमिका निभाते हुए 36 कौमों को एक मंच पर लाकर मारवाड़ की धरती पर सामाजिक समरसता का नया अध्याय लिखा है।उनकी यात्रा साबित करती है कि व्यक्तिगत सफलता और सामाजिक जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती हैं। एक साधारण शेफ से बने इस उद्यमी ने दिखा दिया कि सच्ची समृद्धि तब आती है जब समाज एक होकर आगे बढ़े।
रामदेवरा महासम्मेलन जैसे कार्यक्रम राजस्थान को एक नई दिशा दे रहे हैं – जहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर शिक्षा, सम्मान और एकता पर जोर दिया जाए।मेघराज सिंह रॉयल न केवल राजस्थान के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा हैं। उनकी आवाज और कार्य सामाजिक एकता की मिसाल बनकर उभर रहे हैं। जय राजस्थान! जय एकता!