अब पांचवी के बच्चे होंगे फ़ैल! क्या उनकी पढ़ाई रोकी जाएगी? या फिर कुछ और हैं पूरी कहानी!

जयपुर में शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए सत्र 2026-27 से पांचवीं कक्षा में ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ खत्म कर दी है। अब पांचवीं के छात्रों को फेल भी किया जा सकेगा। नए नियम के तहत मुख्य परीक्षा में फेल होने पर छात्रों को पूरक परीक्षा देनी होगी और उसमें पास होना अनिवार्य होगा। यदि छात्र पूरक परीक्षा में भी असफल रहता है, तो उसे उसी कक्षा में रोका जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ाना है, हालांकि इसे लेकर समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

Apr 8, 2026 - 15:50
Apr 8, 2026 - 15:55
अब पांचवी के बच्चे होंगे फ़ैल! क्या उनकी पढ़ाई रोकी जाएगी? या फिर कुछ और हैं पूरी कहानी!

जयपुर से शिक्षा जगत को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है, जो आने वाले समय में स्कूली व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। सत्र 2026-27 से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनके तहत अब विद्यार्थियों को फेल भी किया जा सकेगा। अब तक लागू रही ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ पर रोक लगा दी गई है, जिससे शिक्षा प्रणाली में सख्ती और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

नो-डिटेंशन नीति पर उठे सवाल
अब तक नियम यह था कि आठवीं कक्षा तक किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाता था, ताकि बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम रहे और वे बिना डर के शिक्षा ग्रहण कर सकें। लेकिन समय के साथ इस नीति पर सवाल उठने लगे थे। शिक्षाविदों और अभिभावकों का मानना था कि बिना मूल्यांकन के आगे बढ़ने से बच्चों की बुनियादी पढ़ाई कमजोर हो रही है और उनमें प्रतिस्पर्धात्मक भावना भी विकसित नहीं हो पा रही।

फेल होने पर अब रुकेंगे छात्र
इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें पांचवीं कक्षा से ही मूल्यांकन को गंभीर बनाया गया है। अब यदि कोई छात्र मुख्य परीक्षा में असफल होता है, तो उसे पूरक परीक्षा (Supplementary Exam) में बैठना होगा और उसमें पास होना अनिवार्य होगा। यदि छात्र पूरक परीक्षा में भी सफल नहीं हो पाता, तो उसे उसी कक्षा में रोका जाएगा।

गुणवत्ता सुधार पर सरकार का फोकस
इस फैसले का उद्देश्य केवल छात्रों को फेल करना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। सरकार का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं में ही अगर बच्चों की पढ़ाई मजबूत की जाए, तो आगे की कक्षाओं में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे छात्रों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ेगी और शिक्षक भी पढ़ाने में अधिक जिम्मेदारी महसूस करेंगे।

फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
हालांकि, इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में एक जरूरी कदम मान रहे हैं, तो वहीं कुछ का कहना है कि इससे छोटे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाता है और इसका छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

कुल मिलाकर, यह बदलाव राजस्थान की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां अब केवल अगली कक्षा में भेजने के बजाय वास्तविक सीख और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी।