PM मोदी की अपील पर BJP नेताओं ने नहीं दिया साथ! ‘मन की बात’ में पहुंचे अपनी-अपनी गाड़ियों से, किफायत का संदेश पड़ा फीका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और किफायत की अपील को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भाजपा संगठन ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से ईवी, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन या कार पूलिंग से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पहुंचने का आग्रह किया था।
राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रसारण को लेकर भाजपा संगठन ने प्रदेश कार्यालय से लेकर बूथ स्तर तक विशेष आयोजन किए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रधानमंत्री के विचारों को सुनना ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट और ईंधन बचत के संदेश को समाज तक पहुंचाना भी था।
इसी उद्देश्य से भाजपा संगठन ने नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV), साइकिल, सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग या संभव हो तो पैदल पहुंचें। लेकिन जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में इस अपील का असर बेहद सीमित दिखाई दिया।
अधिकांश नेता पहुंचे पेट्रोल-डीजल वाहनों से
कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यालय पहुंचे अधिकांश नेताओं और पदाधिकारियों ने संगठन की अपील को नजरअंदाज कर अपनी निजी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का उपयोग किया। स्थिति यह रही कि अधिकांश नेता अपनी-अपनी कारों में अकेले बैठकर कार्यक्रम में पहुंचे।
कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करने वाले नेताओं की संख्या बेहद कम रही। इससे संगठन द्वारा दिया जाने वाला ईंधन बचत और किफायत का संदेश कमजोर पड़ता दिखाई दिया।
इन नेताओं ने निजी वाहनों का किया इस्तेमाल
प्रदेश कार्यालय पहुंचे नेताओं में प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्र सैनी, प्रदेश मंत्री अपूर्वा सिंह, प्रदेश मंत्री एकता अग्रवाल, प्रदेश मंत्री अजीत मांडन, पूर्व प्रदेश मंत्री वासुदेव चावला, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ज्योति खंडेलवाल, जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष अमित गोयल और प्रदेश मीडिया संयोजक प्रमोद वशिष्ठ समेत कई पदाधिकारी अपनी निजी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से पहुंचे।
इनमें से अधिकांश नेता अकेले ही वाहन चलाकर या निजी ड्राइवर के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। संगठन की ओर से सुझाए गए विकल्पों का उपयोग बहुत कम देखने को मिला।
केवल कुछ नेताओं ने निभाई अपील
हालांकि कुछ पदाधिकारियों ने पार्टी की अपील का पालन करते हुए वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग किया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़, कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक और प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र कटारा इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्यक्रम में पहुंचे।
वहीं प्रदेश महामंत्री मुकेश दाधीच कार पूलिंग के माध्यम से भाजपा कार्यालय पहुंचे। इन नेताओं ने संगठन के संदेश को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया।
श्रवण बगड़ी ने की थी विशेष अपील
प्रदेश महामंत्री श्रवण बगड़ी ने कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण संबंधी अपील को समाज तक पहुंचाने के लिए भाजपा विशेष अभियान चलाएगी।
उन्होंने कहा था कि 31 मई को आयोजित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले कार्यकर्ता और नेता ईवी, ई-रिक्शा, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन अथवा पैदल पहुंचकर आमजन को सकारात्मक संदेश दें। साथ ही भाजपा संगठन ने अपने कार्यालयों में ऊर्जा और ईंधन की खपत को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया था।
संदेश और व्यवहार के बीच दिखा अंतर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कोई राजनीतिक दल जनता को किसी सामाजिक या राष्ट्रीय अभियान से जोड़ने की कोशिश करता है तो उसके नेताओं और पदाधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि संगठन की अपील का पालन उसके अपने प्रतिनिधि ही न करें तो जनता के बीच संदेश की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं ने ईवी और कार पूलिंग का उपयोग कर उदाहरण पेश किया, लेकिन बड़ी संख्या में नेताओं का पारंपरिक ईंधन वाले निजी वाहनों से पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा।