असम में अब नहीं चलेगी दूसरी शादी! UCC बिल पास होते ही बदल गए बड़े नियम.. जानिए क्या-क्या बदलाव हुए ..

असम विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। बिल में बहुविवाह पर रोक, शादी-तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।

May 27, 2026 - 16:29
May 27, 2026 - 16:37
असम में अब नहीं चलेगी दूसरी शादी! UCC बिल पास होते ही बदल गए बड़े नियम.. जानिए क्या-क्या  बदलाव हुए ..

असम विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता बिल को पास कर दिया। इसके साथ ही असम देश का तीसरा राज्य बन गया है, जहां विधानसभा ने UCC बिल को मंजूरी दी है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में भी इस दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं।

बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में UCC लागू करने का वादा किया था। चुनाव में प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही UCC बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी थी। अब विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून पूरे राज्य में लागू हो जाएगा।

इस बिल को विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने पेश किया। बिल को लेकर सदन में जोरदार बहस भी हुई। विपक्षी दलों ने कई प्रावधानों का विरोध किया, लेकिन सरकार ने इसे सामाजिक समानता और महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया।

शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

UCC बिल के तहत अब असम में सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। शादी या तलाक के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।

सरकार का कहना है कि इससे फर्जी विवाह, कानूनी विवाद और महिलाओं के शोषण जैसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

बहुविवाह पर पूरी तरह रोक

बिल का सबसे बड़ा और चर्चित प्रावधान बहुविवाह पर प्रतिबंध है। नए कानून के अनुसार किसी भी धर्म का व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। अगर कोई विवाहित रहते हुए दूसरी शादी करता है तो उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है।

सरकार का दावा है कि यह कदम महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी

असम UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाया गया है। अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। अगर रिश्ता खत्म होता है तो उसकी जानकारी भी प्रशासन को देनी होगी।

इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलेगा। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों और महिलाओं के अधिकार सुरक्षित होंगे।

महिलाओं और बेटियों को समान अधिकार

बिल में महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी कई बड़े प्रावधान किए गए हैं। माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को बराबरी का अधिकार मिलेगा। साथ ही पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी सामान्य तौर पर मां को देने का प्रावधान रखा गया है।

सरकार का कहना है कि UCC महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा सुधार साबित होगा।

धोखे से शादी करने पर सख्त सजा

अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर, धोखे से या जबरदस्ती शादी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।

आदिवासी समुदायों को मिली छूट

UCC के दायरे से अनुसूचित जनजाति यानी ST समुदायों को बाहर रखा गया है। चाहे वे पहाड़ी क्षेत्र की जनजातियां हों या मैदानी इलाकों की, उन्हें अपने पारंपरिक रीति-रिवाज और सामुदायिक कानूनों का पालन करने की छूट दी गई है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।

बीजेपी का बड़ा चुनावी वादा पूरा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लंबे समय से असम में UCC लागू करने की बात करते रहे हैं। बीजेपी ने इसे अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल किया था। विधानसभा से बिल पास होने के बाद बीजेपी इसे बड़ी राजनीतिक और वैचारिक जीत मान रही है।

हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह कानून सामाजिक और धार्मिक मामलों में दखल बढ़ा सकता है। लेकिन सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना और महिलाओं को न्याय दिलाना है।

अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद असम में यह कानून औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।

Web Desk Web Desk The Khatak