पाली में UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बड़ा संदेश: “आधा गिलास पानी गिराने पर बुजुर्ग ने टोका, तब समझ आया पानी का असली मूल्य”
पाली में आयोजित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान कार्यक्रम में UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बाड़मेर का एक भावुक किस्सा सुनाते हुए पानी बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पानी का महत्व वही समझ सकता है जिसने इसकी कमी झेली हो।
राजस्थान के पाली जिले में आयोजित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” कार्यक्रम में UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जल संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने बाड़मेर के एक गांव का ऐसा अनुभव साझा किया जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। मंत्री खर्रा ने कहा कि पानी का महत्व वही समझ सकता है जिसने उसकी कमी और संघर्ष को करीब से देखा हो।
कार्यक्रम का आयोजन पाली की पिंजरा पोल गौशाला में किया गया, जहां मंत्री ने पौधरोपण भी किया और लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।
“आधा गिलास पानी गिराया तो बुजुर्ग ने टोका”
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने वर्ष 2017 का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि वह बाड़मेर के एक गांव में गए थे। वहां एक घर में पानी की मनुहार हुई। उन्होंने आधा गिलास पानी पीने के बाद बचा हुआ पानी जमीन पर गिरा दिया।
इस पर वहां मौजूद एक बुजुर्ग ने तुरंत उन्हें टोका। बुजुर्ग ने कहा कि “अगर आप एक गिलास घी भी गिरा देते तो इतनी तकलीफ नहीं होती, जितनी आधा गिलास पानी गिराने से हुई है।”
खर्रा ने बताया कि उन्होंने उस समय कहा था कि अब तो गांव में नहर आ चुकी है और पानी की समस्या नहीं रही होगी। इस पर बुजुर्ग ने जवाब दिया कि “नहर आज आई है, लेकिन हमने जिंदगी भर पानी के लिए जो कष्ट झेले हैं, उन्हें हम कभी नहीं भूल सकते।”
“10-10 दिन में नहाते थे, पानी का बार-बार करते थे उपयोग”
मंत्री खर्रा ने आगे बताया कि बुजुर्ग ने उन्हें बताया था कि बाड़मेर जैसे इलाकों में पानी की इतनी कमी थी कि लोग 10-10 दिन में एक बार नहाते थे। वह भी परात में बैठकर, ताकि पानी बर्बाद न हो।
नहाने के बाद बचा हुआ पानी छानकर कपड़े धोने में इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद जो पानी बचता था, उसका उपयोग लेटबॉथ और पेड़-पौधों में डालने के लिए किया जाता था।
खर्रा ने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि पानी का हमारे जीवन में कितना बड़ा महत्व है और हमें इसकी एक-एक बूंद बचाने की जरूरत है।
“धरती पर पानी बहुत है, लेकिन पीने योग्य सिर्फ 1 प्रतिशत”
अपने संबोधन में मंत्री खर्रा ने कहा कि धरती पर पानी की मात्रा बहुत अधिक है, लेकिन उसका अधिकांश हिस्सा खारा है, जो न पीने के काम आता है और न सिंचाई में। उन्होंने कहा कि केवल 1 प्रतिशत पानी ही ऐसा है जो पीने और खेती के उपयोग के योग्य है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया के कई देश पहले से ही पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। यदि अभी से पानी बचाने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में भारत में भी गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है।
“जनता के सहयोग के बिना सफल नहीं होगा अभियान”
मंत्री खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के जरिए लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है। लेकिन किसी भी सरकारी अभियान की सफलता तभी संभव है जब जनता उसमें सक्रिय भागीदारी निभाए।
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपील की कि वे जल संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें और रोजमर्रा की जिंदगी में पानी बचाने की आदत अपनाएं। कार्यक्रम के अंत में लोगों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई।
गौशाला में दिलचस्प नजारा, गायों ने गुड़-लापसी छोड़ हरा चारा चुना
कार्यक्रम के दौरान पिंजरा पोल गौशाला में एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला। मंत्री खर्रा ने गायों को गुड़ खिलाने की कोशिश की, लेकिन गायों ने गुड़ नहीं खाया। इसके बाद उन्होंने लापसी खिलाने का प्रयास किया, लेकिन गायों ने उसे भी नहीं खाया।
जैसे ही गायों के सामने हरा चारा रखा गया, गायों ने तुरंत उसे खाना शुरू कर दिया। इस पर पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “गायें गुड़ नहीं खा रही हैं।”
इस पर मंत्री खर्रा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “लगता है गौभक्त नियमित रूप से इन्हें गुड़ खिला रहे हैं, इसलिए फिलहाल इस गुड़ को संभालकर रखो। जिस दिन गौभक्त कम आएं, उस दिन काम आएगा।”