कमजोरी नहीं, हौसला बना पहचान… बेटी ने कर दिखाया असंभव को संभव!
पाली की वृषिका कुमावत ने गंभीर रीढ़ की चोट और शारीरिक परेशानी के बावजूद हार नहीं मानी। बिस्तर पर लेटकर पढ़ाई करते हुए उन्होंने RBSE 12वीं कॉमर्स में 93.40% अंक हासिल किए। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने यह साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
पाली 1 अप्रैल 2026 :- राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हिम्मत, संघर्ष और जिद की मिसाल बन गई है। गंभीर शारीरिक परेशानी के बावजूद वृषिका कुमावत ने 12वीं कॉमर्स में 93.40% अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं।
5 साल पहले हादसे ने बदल दी जिंदगी
पाली के दुर्गा कॉलोनी की रहने वाली वृषिका के जीवन में 5 अगस्त 2021 का दिन बेहद दर्दनाक साबित हुआ। छत से करीब 15 फीट नीचे गिरने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। इस हादसे के बाद शरीर का निचला हिस्सा प्रभावित हो गया और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं।
इलाज के लिए जोधपुर से लेकर अहमदाबाद तक प्रयास किए गए, परिवार ने लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन स्थिति में सीमित सुधार ही हो सका। डॉक्टरों ने लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी।
बिस्तर पर लेटकर जारी रखी पढ़ाई
जहां एक ओर ऐसी स्थिति में पढ़ाई छोड़ देना आम बात होती है, वहीं वृषिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनकी इस जिद में परिवार और शिक्षकों ने पूरा साथ दिया।
वंदे मातरम स्कूल के शिक्षकों ने भी उनका हौसला बढ़ाया और जरूरत पड़ने पर घर जाकर पढ़ाया। इससे वृषिका को लगातार पढ़ाई में मदद मिलती रही।
मां-बाप बने सबसे बड़ी ताकत
वृषिका की मां संगीता देवी ने हर छोटे-बड़े काम में उनका साथ दिया—नहलाने से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक। पिता रमेश कुमार, जो पेशे से फोटोग्राफर हैं, उन्होंने अपनी जमा पूंजी बेटी के इलाज में लगा दी और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया।
वृषिका खुद मानती हैं कि उनका संघर्ष तो छोटा है, असली संघर्ष उनके माता-पिता ने किया है।
रिजल्ट आया तो छलक पड़े आंसू
जब 12वीं का रिजल्ट घोषित हुआ और वृषिका ने 93.40% अंक हासिल किए, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। स्कूल स्टाफ ने भी साफा पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका सम्मान किया।
अब CA बनना है सपना
आज वृषिका छड़ी के सहारे चलती हैं, लेकिन उनके सपने बहुत बड़े हैं। वह आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती हैं, ताकि अपने माता-पिता का सहारा बन सकें और समाज के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बनें।वृषिका की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। शारीरिक सीमाएं मन की उड़ान को रोक नहीं सकतीं।