जोधपुर सेंट्रल जेल में सुरक्षा की पोल खुली: वार्ड नंबर 11 की बैरक 1 से बरामद हुआ मोबाइल फोन, पुलिस ने दर्ज किया मामला
जोधपुर सेंट्रल जेल के वार्ड 11, बैरक 1 से मोबाइल फोन बरामद, जेल नियमों का उल्लंघन, रातानाड, पुलिस जांच शुरू।
जोधपुर, 7 नवंबर 2025:
राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित ऐतिहासिक सेंट्रल जेल, जिसे देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है, एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों के कारण सुर्खियों में आ गई है। जेल प्रशासन द्वारा की गई नियमित तलाशी अभियान के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें जेल के वार्ड नंबर 11 में स्थित बैरक नंबर 1 से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। यह प्रतिबंधित वस्तु न केवल जेल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि कैदियों के बीच अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाहर के अपराधी तत्वों से संपर्क की आशंका को भी जन्म देती है। जेल के उप अधीक्षक ने इसकी सूचना तत्काल स्थानीय रातानाडा थाने में दी, जहां औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, और रिपोर्ट में फोन के कब्जे वाले कैदी तथा इसे जेल में कैसे लाया गया, इसकी विस्तृत जानकारी दर्ज की गई है।
घटना का पूरा विवरण: तलाशी से खुलासा जोधपुर सेंट्रल जेल में कैदियों की संख्या हमेशा अधिक रहने के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाती है। जेल अधीक्षक के निर्देश पर नियमित रूप से तलाशी अभियान चलाए जाते हैं, ताकि प्रतिबंधित सामग्री जैसे मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नशीले पदार्थ या अन्य वस्तुओं को रोका जा सके। गुरुवार को हुई इस तलाशी के दौरान जेल स्टाफ ने वार्ड नंबर 11 की बैरक नंबर 1 में गहन जांच की। बैरक के बिस्तरों, दीवारों की दरारों और अन्य छिपने की जगहों की तलाशी लेने पर एक पुराना की-पैड मोबाइल फोन बरामद हुआ। फोन के साथ एक सिम कार्ड भी था, जो सक्रिय होने का संकेत दे रहा था। जेल के उप अधीक्षक ने बताया कि तलाशी के दौरान कैदी सतपाल (विचाराधीन बंदी) के पास से यह फोन मिला, जिसने पूछताछ में स्वीकार किया कि यह फोन बाहर से किसी माध्यम से लाया गया था। हालांकि, फोन कैसे और किसके माध्यम से जेल के अंदर पहुंचा, इसकी पूरी कड़ी अभी स्पष्ट नहीं हुई है। जेल प्रशासन ने तुरंत इसकी रिपोर्ट रातानाडा थाने को भेजी, जहां थानाधिकारी दिनेश लखावत के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने एफआईआर दर्ज की। मामला कारागार अधिनियम 1894 की धारा 42 के तहत दर्ज किया गया है, जो जेल में प्रतिबंधित वस्तुओं के उपयोग को अपराध मानता है। पुलिस ने फोन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि कॉल रिकॉर्ड्स और मैसेज इतिहास से बाहर के संपर्कों का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: एक लंबी समस्या की कड़ी यह घटना जोधपुर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोनों की बरामदी का पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यहां से दर्जनों फोन, सिम कार्ड, डेटा केबल और यहां तक कि नशीले पदार्थ बरामद हो चुके हैं, जो जेल की सुरक्षा प्रणाली में गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं,इन घटनाओं से साफ है कि जेल की ऊंची दीवारें और सख्त चेकिंग के बावजूद, कर्मचारियों की मिलीभगत या लापरवाही से प्रतिबंधित सामग्री अंदर पहुंच रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन कैदियों को बाहर के अपराधी सिंडिकेट से जोड़े रखते हैं, जिससे जेल के अंदर साजिशें रची जा सकती हैं।
जांच और आगे की कार्रवाई; रातानाडा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। थानाधिकारी दिनेश लखावत ने बताया कि जांच टीम बैरक के अन्य कैदियों से पूछताछ कर रही है, ताकि फोन लाने वाले बाहरी व्यक्ति या जेल कर्मचारी की पहचान हो सके। जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने कहा कि इस घटना के बाद पूरे वार्ड की दोबारा तलाशी ली जा रही है, और संदिग्ध कर्मचारियों पर नजर रखी जा रही है। जेल महानिदेशालय ने भी निर्देश जारी किए हैं कि सभी जेलों में इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्टरों का उपयोग बढ़ाया जाए। यदि जांच में कर्मचारियों की संलिप्तता साबित हुई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।