महिलाओं के सवालों के आगे टूट गई महिला अफसर! झुंझुनूं में कार के अंदर फूट-फूट कर रोई JEN
झुंझुनूं में महीनों से पानी के लिए तरस रही महिलाओं का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब जांच करने पहुंची महिला JEN को ग्रामीणों ने घेर लिया। जानिए पूरा मामला
राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवलगढ़ इलाके की ढाणियां पंचायत में महीनों से पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर पहुंची जलदाय विभाग की महिला जेईएन अंतरा मीणा जनता के बीच अपनी कार में बैठकर फूट-फूट कर रोने लगीं।
बताया जा रहा है कि गांव में पिछले पांच से छह महीनों से भीषण जल संकट बना हुआ है। गांव में पानी की टंकी और दो-दो ट्यूबवेल होने के बावजूद नियमित जल सप्लाई नहीं हो रही। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके हिस्से का पानी चोरी कर शहर की ओर भेजा जा रहा है, जबकि गांव की महिलाएं हर दिन पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
गुस्से का माहौल उस समय बना जब जलदाय विभाग की जेईएन अंतरा मीणा इलाके में निरीक्षण करने पहुंचीं। जैसे ही उनकी गाड़ी गांव में पहुंची, बड़ी संख्या में महिलाएं इकट्ठा हो गईं और उन्होंने अधिकारी की कार को चारों तरफ से घेर लिया। महिलाओं ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जताई।
महिलाओं का कहना था कि कई महीनों से शिकायतें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसी दौरान महिलाओं ने अधिकारी से तीखे सवाल किए और कहा कि आखिर कब तक गांव की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती रहेगी।
विरोध और भारी दबाव के बीच महिला जेईएन भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मौके पर मौजूद एक महिला ने कहा—
“मैडम, आप तो आज रो रही हो, हम तो महीनों से रो रहे हैं।”
यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी कुछ देर के लिए भावुक हो गए। हालांकि जेईएन अंतरा मीणा ने बाद में उच्च अधिकारियों को फोन कर सुरक्षा की मांग की। उनका कहना था कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कर्मचारियों की बाइक की चाबी तक छीनी गई।
वहीं ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने केवल अपना हक मांगा है और किसी तरह की हाथापाई नहीं की गई। स्थानीय नेताओं ने भी जलदाय विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और जल्द समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक अधिकारी के आंसू गांव की प्यास बुझा पाएंगे? क्या प्रशासन इस जल संकट का स्थायी समाधान निकाल पाएगा या फिर ग्रामीणों को यूं ही पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?