जयपुर के निजी अस्पतालों में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार: डॉक्टरों का आरोप हाईकोर्ट में बंसल के परिजनों से अभद्रता, दोषियों पर कार्रवाई की मांग से बढ़ा विवाद
जयपुर में डॉक्टरों के बड़े फैसले से हड़कंप मच गया है… हाईकोर्ट में हुई एक घटना के बाद निजी अस्पतालों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। आखिर कोर्ट परिसर में ऐसा क्या हुआ कि पूरा मेडिकल सिस्टम विरोध में उतर आया? जानिए पूरा मामला…
राजधानी जयपुर में चिकित्सा सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने वाला है, क्योंकि निजी अस्पतालों और डॉक्टरों ने गुरुवार रात से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद शहर में स्वास्थ्य सेवाओं के ठप होने का खतरा पैदा हो गया है। डॉक्टरों का आरोप है कि राजस्थान हाईकोर्ट में डॉ. सोनदेव बंसल की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एक गंभीर घटना हुई, जिसमें उनके पिता और भाई के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। इस घटना के बाद चिकित्सा जगत में भारी आक्रोश फैल गया है।
कोर्ट में हंगामा, सुनवाई टली
जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान वकीलों के एक समूह ने कोर्ट रूम में नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो गई। स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई 11 मई तक स्थगित कर दी।
परिवार के साथ मारपीट का आरोप
डॉक्टरों का कहना है कि कोर्ट परिसर में डॉ. बंसल के पिता और भाई के साथ न केवल दुर्व्यवहार हुआ, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। इस घटना ने पूरे चिकित्सा समुदाय को झकझोर दिया है।
निजी अस्पतालों की सेवाएं बंद
घटना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जयपुर, जयपुर मेडिकल एसोसिएशन और पीएचएनएचएस सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। इसके तहत शहर के सभी निजी अस्पतालों में ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रहेंगी।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
चिकित्सक संगठनों ने सरकार और प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- डॉ. सोनदेव बंसल को न्याय दिलाया जाए
- कोर्ट प्रक्रिया में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो
- चिकित्सकों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- कोर्ट और अस्पतालों में भयमुक्त माहौल बनाया जाए
- डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और दबाव पर रोक लगे
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
इस फैसले के बाद जयपुर में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। निजी अस्पतालों की सेवाएं बंद होने से इलाज व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ने की आशंका है।