झालाना कर्मचारी चयन बोर्ड भवन में मजदूर की दर्दनाक मौत: ठेकेदार पर लापरवाही के गंभीर आरोप, परिजनों का अस्पताल में धरना
जयपुर के झालाना स्थित राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड भवन में निर्माण कार्य के दौरान 23 वर्षीय मजदूर शिवराज बैरवा की लिफ्ट शाफ्ट में गिरने से मौत हो गई। ठेकेदार किशोरी कंस्ट्रक्शन कंपनी पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगा है, क्योंकि शाफ्ट खुला छोड़ दिया गया था और रोशनी व बैरिकेडिंग नहीं थी। परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर जयपुरिया अस्पताल में धरना दिया, जिससे पोस्टमॉर्टम देर से हुआ। पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
जयपुर के झालाना क्षेत्र में स्थित राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) भवन में निर्माण कार्य के दौरान एक युवा मजदूर की मौत हो गई। यह हादसा 5 जनवरी 2026 की रात करीब 9 बजे हुआ, जिसमें 23 वर्षीय शिवराज बैरवा की जान चली गई। शिवराज जयपुर जिले के माधोराजपुरा तहसील के गांव पीपला के निवासी थे और किशन लाल बैरवा के पुत्र थे। वे राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (R.S.R.D.C. LTD.) के अधीन कार्यरत ठेकेदार फर्म किशोरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में मजदूरी का काम कर रहे थे।
हादसे की पूरी घटनाक्रम घटना के अनुसार, शिवराज भवन के बेसमेंट में VDC (सीमेंट कंक्रीट) फर्श का कार्य कर रहे थे। रात के समय पानी पीने के लिए वे ग्राउंड फ्लोर पर गए और वापस बेसमेंट लौटते समय सीढ़ियों के पास स्थित लिफ्ट शाफ्ट की खाली जगह में गिर गए। लिफ्ट का शाफ्ट लगभग 25 से 30 फीट गहरा था, जो पूरी तरह खुला छोड़ दिया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गहरे गड्ढे के आसपास कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी – न तो बैरिकेडिंग, न जाली, न चेतावनी बोर्ड और न ही पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था। अंधेरे में शिवराज को यह खुला शाफ्ट नजर नहीं आया और वे सीधे उसमें जा गिरे।हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद सहकर्मियों ने शिवराज को गंभीर हालत में देखा और 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण गहरी चोटें और आंतरिक रक्तस्राव बताया गया है।
ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप और पुलिस कार्रवाई मृतक के पिता प्रहलाद बैरवा ने ठेकेदार फर्म किशोरी कंस्ट्रक्शन कंपनी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गांधी नगर थाना (जयपुर ईस्ट) में मुकदमा दर्ज कराया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निर्माण स्थल पर बुनियादी सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई। खुला लिफ्ट शाफ्ट बिना किसी घेराबंदी के छोड़ना, रोशनी की कमी और चेतावनी संकेतों का अभाव – ये सभी बिंदु ठेकेदार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हैं।पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ठेकेदार फर्म के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। जांच जारी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और ठेकेदार की कितनी जिम्मेदारी बनती है। पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर सबूत जुटा रहे हैं और सहकर्मियों से बयान ले रहे हैं।
परिजनों का आक्रोश और धरना हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए। न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर उन्होंने मंगलवार (6 जनवरी 2026) सुबह से जयपुरिया अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि ठेकेदार और कंपनी की लापरवाही से उनके परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य चला गया। वे मुआवजे के साथ-साथ ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।धरने के कारण मंगलवार रात तक पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। परिजन अस्पताल के बाहर ही डटे रहे और देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है। अक्सर ठेकेदार लागत बचाने के चक्कर में सुरक्षा उपकरणों और मानकों की अनदेखी करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे दर्दनाक हादसे होते हैं।