जयपुर का राजमंदिर मनाएगा गोल्डन जुबली: 50 साल पूरे होने पर 5 क्लासिक फिल्में फ्री दिखाएगा एशिया का आइकॉनिक थिएटर

जयपुर का प्रतिष्ठित राजमंदिर सिनेमा हॉल 1 जून को अपनी गोल्डन जुबली मनाने जा रहा है। 50 साल पूरे होने के मौके पर दर्शकों को 5 क्लासिक फिल्में मुफ्त दिखाई जाएंगी। अपनी भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक फिल्मों और अनोखे सिनेमाई अनुभव के लिए मशहूर राजमंदिर आज भी दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है।

May 27, 2026 - 10:39
जयपुर का राजमंदिर मनाएगा गोल्डन जुबली: 50 साल पूरे होने पर 5 क्लासिक फिल्में फ्री दिखाएगा एशिया का आइकॉनिक थिएटर

जयपुर की पहचान बन चुका और एशिया के सबसे प्रतिष्ठित सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में शामिल राजमंदिर सिनेमा हॉल अब अपने 50 साल पूरे करने जा रहा है। 1 जून को गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के मौके पर राजमंदिर दर्शकों को खास तोहफा देगा। इस अवसर पर पांच सुपरहिट और क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग बिल्कुल मुफ्त की जाएगी।

अपनी शानदार वास्तुकला, शाही माहौल और अलग सिनेमाई अनुभव के लिए दुनियाभर में मशहूर राजमंदिर सिनेमा का यह जश्न जयपुरवासियों और फिल्म प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है।

50 साल पूरे होने पर मुफ्त दिखाई जाएंगी फिल्में

राजमंदिर सिनेमा के मालिक सौरभ सुराणा ने बताया कि वर्ष 1976 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक सिनेमाघर ने 50 वर्षों का सफर पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि दर्शकों के प्यार और विश्वास की वजह से संभव हो सकी है। इसी खुशी में 1 जून को पांच क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग मुफ्त की जाएगी।

उन्होंने बताया कि दर्शकों को टिकट बुकमायशो और राजमंदिर के बॉक्स ऑफिस विंडो से बुक करनी होगी। यह पहल शहरवासियों को धन्यवाद देने और उनके साथ इस खास पल को साझा करने के लिए की जा रही है।

दिखाई जाएंगी ये 5 यादगार फिल्में

गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के तहत जिन फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी, उनमें शामिल हैं—

  • हम आपके हैं कौन
  • दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
  • राम तेरी गंगा मैली
  • जिंदगी ना मिलेगी दोबारा
  • चुपके-चुपके

सौरभ सुराणा ने बताया कि फिल्मों का चयन परिवारों और हर उम्र के दर्शकों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि “हम आपके हैं कौन” राजमंदिर में करीब डेढ़ साल तक चली थी, जबकि “राम तेरी गंगा मैली” ने यहां 52 सप्ताह तक दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचे रखा।

वास्तुकला ने दिलाई दुनियाभर में पहचान

राजमंदिर सिनेमा सिर्फ फिल्मों के लिए नहीं, बल्कि अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए भी मशहूर है। इसे आर्ट डेको स्टाइल में तैयार किया गया था। यहां की लकड़ी की नक्काशी, पीओपी डिजाइन, विशाल झूमर, विशेष लाइटिंग और शानदार इंटीरियर दर्शकों को आज भी आकर्षित करते हैं।

राजमंदिर का माहौल ऐसा है कि यहां आने वाले लोग सिर्फ फिल्म देखने नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक सिनेमाघर को महसूस करने आते हैं। यही वजह है कि यह थिएटर दुनियाभर के पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है।

राज कपूर ने की थी राजमंदिर की तारीफ

सौरभ सुराणा ने एक खास किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर राजमंदिर आए थे, तब उन्होंने कहा था—

“दुनिया को सीखना चाहिए कि फिल्म को प्रदर्शित कैसे किया जाता है।”

उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान जब नई फिल्में रिलीज नहीं हो रही थीं, तब राजमंदिर ने पुरानी लोकप्रिय फिल्मों की स्क्रीनिंग कर दर्शकों को सिनेमाघर से जोड़े रखा। इसी दौरान यहां का साउंड सिस्टम बदला गया और सीटिंग अरेंजमेंट को भी पहले से ज्यादा आरामदायक बनाया गया।

“लोग यहां फिल्म नहीं, राजमंदिर देखने आते हैं”

राजमंदिर के जनरल मैनेजर अशोक तंवर पिछले 50 वर्षों से इस सिनेमाघर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पुराने दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि पहले टिकट के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती थीं और बड़े अधिकारियों तक के फोन टिकट के लिए आते थे।

उन्होंने कहा कि जयपुर के कई पुराने सिनेमाघर बंद हो चुके हैं, लेकिन राजमंदिर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है, क्योंकि लोग यहां सिर्फ फिल्म देखने नहीं, बल्कि राजमंदिर का अनुभव लेने आते हैं।

टिकट नहीं मिलने पर IPS बनने का लिया फैसला

अशोक तंवर ने एक दिलचस्प घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि टोंक से आए एक युवक हरेंद्र कुमार महावर को एक बार लंबी लाइन के कारण टिकट नहीं मिल पाया। उसी दिन उसने बड़ा अधिकारी बनने का फैसला किया। बाद में उसने यूपीएससी की तैयारी की और IPS अधिकारी बना। वर्षों बाद जयपुर में पोस्टिंग होने पर उसने यह किस्सा खुद आकर सुनाया। वर्तमान में वह कोटा में आईजी पद पर कार्यरत हैं।

आसान नहीं था राजमंदिर का सफर

राजमंदिर की परिकल्पना मेहताब चंद गोलछा ने की थी। जब इसका निर्माण हो रहा था, तब सेंट जेवियर्स स्कूल की ओर से कोर्ट में केस दायर किया गया था कि सिनेमाघर बनने से छात्रों पर गलत असर पड़ेगा। यह मामला कई वर्षों तक चला।

बाद में सुराणा परिवार ने इसे खरीदा और कानूनी लड़ाई जीतने के बाद इसकी शुरुआत की। अशोक तंवर के अनुसार, उस समय जिला प्रशासन की ओर से भी लाइसेंस नहीं दिया जा रहा था। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरदेव जोशी के हस्तक्षेप के बाद इसे अनुमति मिली।

पहली फिल्म थी ‘चरस’

राजमंदिर में पिछले 50 वर्षों से फिल्म प्रोजेक्शन का काम देख रहे कैलाश शर्मा ने बताया कि यहां पहली फिल्म “चरस” लगी थी। उस दौर में टिकटों के लिए लंबी लाइनें लगती थीं।

उन्होंने बताया कि एक बार राज कपूर खुद “राम तेरी गंगा मैली” देखने यहां आए थे। फिल्म देखने के बाद उन्होंने प्रोजेक्शन की गुणवत्ता की तारीफ करते हुए कहा था कि फिल्म का प्रिंट बिल्कुल नया लग रहा है। इस बात से खुश होकर उन्होंने इनाम देने की बात कही थी, लेकिन बाद में उनका निधन हो गया।

राजमंदिर में रिकॉर्ड बनाने वाली फिल्में

राजमंदिर सिनेमा में कई फिल्मों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए। इनमें सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाली फिल्मों में—

  • हम आपके हैं कौन — 525 दिन
  • राम तेरी गंगा मैली — 497 दिन
  • प्रतिघात — 321 दिन
  • बेटा — 273 दिन
  • मैंने प्यार किया — 224 दिन
  • नसीब — 217 दिन
  • विदाता — 210 दिन
  • विवाह — 168 दिन
  • दिल तो पागल है — 161 दिन
  • कुछ कुछ होता है — 126 दिन

जैसी कई सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

आज भी राजमंदिर जयपुर की सांस्कृतिक पहचान और भारतीय सिनेमा की विरासत का प्रतीक माना जाता है। 50 साल पूरे होने का यह जश्न न सिर्फ एक सिनेमाघर की उपलब्धि है, बल्कि उस दौर की याद भी है जब फिल्में सिर्फ देखी नहीं, बल्कि महसूस की जाती थीं।

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