राजस्थान: बनास नदी पर बने गहलोद ब्रिज का लोड टेस्ट शुरू, 243 टन वजन से होगी मजबूती की जांच
राजस्थान के टोंक में बनास नदी पर बने 135 करोड़ रुपये के गहलोद हाई लेवल ब्रिज का लोड टेस्ट शुरू हो गया है। 243 टन वजन के 9 ट्रकों से पुल की मजबूती और सुरक्षा क्षमता की जांच की जा रही है।
राजस्थान के टोंक जिले में बनास नदी पर बने राज्य के सबसे लंबे हाई लेवल गहलोद ब्रिज का आज से लोड टेस्ट शुरू किया गया है। करीब 135 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल की मजबूती और सुरक्षा क्षमता की विस्तृत जांच की जा रही है।
इस टेस्ट के दौरान 243 टन वजन के 9 भारी ट्रक पुल पर खड़े कर उसकी भार वहन क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
कैसे हो रहा है लोड टेस्ट?
PWD इंजीनियरों के अनुसार यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जा रही है:
- पहले दिन पुल पर टेम्परेचर टेस्ट किया गया
- पुल के नीचे विशेष मशीनें लगाकर झुकाव और तापमान के अनुसार बदलाव रिकॉर्ड किए गए
- बुधवार से 9 ट्रक (प्रत्येक 27 टन) क्रमवार पुल पर खड़े किए जाएंगे
- प्रत्येक ट्रक एक-एक घंटे के अंतराल पर रखा जाएगा
24 घंटे तक रहेगा भारी लोड
लोड टेस्ट के दूसरे चरण में:
- सभी 9 ट्रक 24 घंटे तक पुल पर खड़े रहेंगे
- इसके बाद ट्रकों को धीरे-धीरे एक-एक घंटे के अंतराल पर हटाया जाएगा
- इस दौरान इंजीनियर यह रिकॉर्ड करेंगे कि पुल कितना झुका और कितनी रिकवरी हुई
85% रिकवरी पर ही पास होगा टेस्ट
इस लोड टेस्ट का सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है:
- यदि पुल वजन हटने के बाद 85% तक अपनी मूल स्थिति में लौटता है, तो इसे सुरक्षित और गुणवत्ता पूर्ण माना जाएगा
- इससे कम रिकवरी होने पर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ सकता है
30 किलोमीटर की दूरी होगी कम
यह पुल टोंक जिले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है:
- टोंक से कई क्षेत्रों की दूरी लगभग 30 किलोमीटर तक कम हो जाएगी
- बारिश के मौसम में रास्ता बंद होने की समस्या खत्म होगी
- टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू और अजमेर से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी
4 साल में हुआ निर्माण
- पुल की स्वीकृति वर्ष 2021 में मिली थी
- करीब 4 साल में निर्माण पूरा हुआ
- कुछ महीने पहले निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था
वैकल्पिक मार्ग से ट्रैफिक डायवर्ट
लोड टेस्ट के दौरान:
- पुल पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है
- वाहनों को झिराना–सोहेला वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है
- यह टेस्ट 30 मई तक जारी रहेगा
निष्कर्ष
गहलोद ब्रिज का यह लोड टेस्ट राजस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अगर यह पुल सफलतापूर्वक टेस्ट पास करता है, तो यह टोंक और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत साबित होगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।