फर्जी सिम देकर नकली नोट गिरोह को मदद करने के मामले में जयपुर से दो आरोपी गिरफ्तार, मात्र 200 रुपये के लालच में बेची सिम
मात्र 200 रुपये के लालच में जयपुर के दो एजेंटों ने ग्राहकों के दस्तावेज़ व लाइव फोटो चुराकर फर्जी सिम जारी की और नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड को बेची। सीकर पुलिस ने नकली नोट केस से शुरू हुई जांच में जयपुर से विनोद प्रजापत व कृश कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया।
सीकर। नकली नोटों के कारोबार को चलाने के लिए फर्जी सिम कार्ड की सप्लाई करने वाले दो लोगों को सीकर कोतवाली पुलिस ने जयपुर से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी मात्र 200 रुपये के लालच में एक आम युवक के दस्तावेजों और लाइव फोटो का दुरुपयोग कर नई सिम जारी करवाते थे और उसे नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड को बेच देते थे।
गिरफ्तार आरोपी विनोद प्रजापत (पिता गणेश प्रजापत), निवासी बगरू, जयपुर → टेलीकॉम कंपनी की सिम डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी धारक
कृश कुमार वर्मा (पिता राजेंद्र कुमार), निवासी बगरू → विनोद की एजेंसी में सब-एजेंट के तौर पर काम करता था। दोनों आरोपी जयपुर में रोड किनारे छतरी लगाकर सिम पोर्टिंग और नई सिम जारी करने का काम करते थे।
कैसे पकड़ा गया पूरा नेटवर्क? नवंबर 2025 में सीकर कोतवाली पुलिस ने एक छात्र लालचंद को गिरफ्तार किया था। लालचंद सीकर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह बाजार में 500-500 रुपये के नकली नोटों से सामान खरीद रहा था। दुकानदारों को शक हुआ तो वे उसके हॉस्टल पहुंचे और हॉस्टल स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी।पुलिस ने लालचंद के कमरे से 24 नकली 500 रुपये के नोट बरामद किए।पूछताछ में लालचंद ने खुलासा किया कि वह अपने रिश्तेदार परमेश्वर के साथ जयपुर से नकली नोट लेकर आया था। इसके बाद पुलिस फरीदाबाद (हरियाणा) पहुंची और परमेश्वर को भी गिरफ्तार कर लिया। परमेश्वर के पास से भी 22 नकली 500 रुपये के नोट बरामद हुए।दोनों ने बताया कि नकली नोट उन्हें जयपुर के मानसरोवर इलाके में हेलमेट पहने एक युवक ने दिए थे और बात सिर्फ फोन पर हुई थी। पुलिस ने उस नंबर की जांच की तो पता चला कि वह सिम किसी और व्यक्ति के नाम पर जारी की गई थी।जब उस व्यक्ति (जिसके नाम पर सिम थी) से पूछताछ की गई तो उसने बताया:“मैंने तो कभी कोई सिम नकली नोटों के लिए यूज नहीं की। मैं तो जयपुर में अपनी पुरानी सिम पोर्ट करवाने गया था।”उसके बताए पते पर पुलिस पहुंची तो विनोद और कृश का पता चला।
आरोपियों का तरीका ग्राहक सिम पोर्ट करवाने आता था।आरोपी कहते थे कि “लाइव फोटो सही नहीं आ रही, दोबारा क्लिक करते हैं”।पहली फोटो से असली ग्राहक की सिम पोर्ट कर देते थे।दूसरी फोटो और उसी व्यक्ति के दस्तावेजों (आधार, फोटो) से एक नई फर्जी सिम तुरंत जारी कर लेते थे।फिर उस फर्जी सिम को 200 रुपये लेकर नकली नोट गिरोह के व्यक्ति को बेच देते थे।आरोपी यह भी कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि सिम लेने वाला कौन था और वह इसका इस्तेमाल किस लिए करेगा।
पुलिस का बयान शहर कोतवाल सुनील कुमार जांगिड़ ने कहा:“फर्जी सिम जारी करना बेहद गंभीर अपराध है। ऐसी सिम का इस्तेमाल नकली नोट, ठगी, साइबर क्राइम से लेकर आतंकी गतिविधियों तक में हो सकता है। हम अभी नकली नोट गिरोह के मास्टरमाइंड और बाकी फरार आरोपियों की तलाश कर रहे हैं।”पुलिस अब उन सभी लोगों की जांच कर रही है जिनकी सिम विनोद और कृश ने पिछले कुछ महीनों में जारी की थी। साथ ही नकली नोट सप्लाई करने वाले मुख्य सरगना तक पहुंचने के लिए सीडीआर और टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया जा रहा है।