2 करोड़ रुपए का सोना पहन निकलेगी गवर-माता की शोभायात्रा: 27 मार्च को ससुराल के लिए रवाना होंगी; जोधपुर की कोमल राठी ने तैयार किए भव्य परिधान

जोधपुर में गणगौर पर्व के दौरान गवर माता की भव्य शोभायात्रा 27 मार्च को ससुराल पुंगलपाड़ा के लिए रवाना होगी। इस वर्ष लाल सागर निवासी कोमल राठी ने माता के परिधान तैयार किए हैं। यात्रा में करीब 3 किलो सोने के आभूषण (मूल्य लगभग 2 करोड़ रुपये) पहनाए जाएंगे। माता चांदी की बग्घी में सवार होकर राखी हाउस से घंटाघर तक शोभायात्रा में शामिल होंगी। यह 70 साल पुरानी परंपरा जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 24, 2026 • 1:31 PM  8
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राजस्थान
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2 करोड़ रुपए का सोना पहन निकलेगी गवर-माता की शोभायात्रा: 27 मार्च को ससुराल के लिए रवाना होंगी; जोधपुर की कोमल राठी ने तैयार किए भव्य परिधान
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24 Mar 2026
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2 करोड़ रुपए का सोना पहन निकलेगी गवर-माता की शोभायात्रा: 27 मार्च को ससुराल के लिए रवाना होंगी; जोधपुर की कोमल राठी ने तैयार किए भव्य परिधान

जोधपुर, राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी में गणगौर पर्व के दौरान गवर माता की शोभायात्रा को लेकर जोरदार तैयारियां चल रही हैं। इस वर्ष माता के शृंगार और परिधान की जिम्मेदारी लाल सागर क्षेत्र की निवासी कोमल राठी (पत्नी विक्की राठी) को सौंपी गई है। कोमल राठी ने गवर माता के लिए खास परिधान तैयार किए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर काफी उत्साह और गर्व का माहौल बना हुआ है।

गवर माता की परंपरा और यात्रा का कार्यक्रम

गवर माता को मारवाड़ी परंपरा में भगवान शिव की पत्नी पार्वती का रूप माना जाता है। यह पर्व सुहाग और दांपत्य जीवन की कामना से जुड़ा है। जोधपुर में गवर माता साल में एक बार अपने ससुराल पुंगलपाड़ा से 7 दिनों के लिए पीहर आती हैं। चैत्र शुक्ल तृतीया को पीहर पहुंचने के बाद 27 मार्च को वे वापस ससुराल लौटेंगी।

इस दिन माता का विशेष शृंगार किया जाता है और शहर में विभिन्न धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। शोभायात्रा में माता चांदी की बग्घी में सवार होकर निकलती हैं। यात्रा का मार्ग आमतौर पर राखी हाउस से घंटाघर तक होता है, जहां मेला लगता है। इसके बाद माता वापस राखी हाउस लौटती हैं और फिर पुंगलपाड़ा (ससुराल) के लिए रवाना हो जाती हैं।यह भव्य मेला और शोभायात्रा लगभग 70 वर्षों से निरंतर चली आ रही है, जो जोधपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।

2 करोड़ रुपए का सोना और भव्य शृंगार

शोभायात्रा के दौरान गवर माता को भारी मात्रा में सोने के आभूषण पहनाए जाते हैं। इस वर्ष करीब 3 किलो सोना (मूल्य लगभग 2 करोड़ रुपए) का उपयोग माता के शृंगार में किया जाएगा। इन आभूषणों में पारंपरिक डिजाइन वाले गहने शामिल हैं, जो माता को दिव्य और राजसी रूप प्रदान करते हैं।

कोमल राठी द्वारा तैयार किए गए परिधान इस शृंगार को और भी आकर्षक बनाएंगे। हर वर्ष गवर माता के परिधान के लिए अलग-अलग स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं को अवसर दिया जाता है, जिससे परंपरा को नई ऊर्जा मिलती है और सांस्कृतिक विविधता बनी रहती है। कोमल राठी के चयन से लाल सागर क्षेत्र में विशेष खुशी का माहौल है।

सांस्कृतिक महत्व

गणगौर (या गवर पूजन) राजस्थान का प्रमुख त्योहार है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्रार्थना करती हैं। जोधपुर में यह पर्व दो चरणों में मनाया जाता है—पहले पखवाड़े में घुड़ला गवर और दूसरे में धींगा गवर। शोभायात्रा के समय गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और पारंपरिक वेशभूषा के साथ पूरा शहर रंग-बिरंगे उत्सव में डूब जाता है।स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी परंपराएं न केवल आस्था को मजबूत करती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में भी मददगार साबित होती हैं। इस बार कोमल राठी जैसे स्थानीय कलाकार के योगदान से उत्सव और अधिक यादगार बनने वाला है।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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