आखिर महिलाओं को मंगलसूत्र-चूड़ियां उतरवाने के बाद क्यों मिली एंट्री? परीक्षा केंद्रों पर दिखा हैरान कर देने वाला नजारा
टोंक में भर्ती परीक्षा के दौरान ऐसी सख्ती देखने को मिली जिसने सबको चौंका दिया समय से पहले बंद हुए गेट, कड़ी बायोमैट्रिक जांच और ड्रेस कोड की सख्ती के बीच हजारों अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई, लेकिन इस सख्त व्यवस्था के पीछे बड़ा कारण क्या है, यह अभी भी सवाल बना हुआ है।
राजस्थान के टोंक जिले में प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा इस बार बेहद सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था लागू की कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की एंट्री से लेकर परीक्षा शुरू होने तक हर कदम पर कड़ी निगरानी रखी गई। इस परीक्षा के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने कुल 47,457 अभ्यर्थियों को रजिस्टर्ड किया था। टोंक जिले में इसके लिए 29 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां हजारों अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
समय से पहले बंद हुए परीक्षा केंद्रों के गेट
परीक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी सख्ती यह रही कि निर्धारित समय से एक घंटे पहले ही सभी परीक्षा केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे कई उम्मीदवारों को समय पर पहुंचने के बावजूद परेशानी का सामना करना पड़ा।
बायोमैट्रिक और फेस स्कैन से हुई एंट्री
परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले हर अभ्यर्थी की गहन जांच की गई। इसमें शामिल था—
- बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन
- फेस स्कैन
- पहचान पत्र की जांच
इसके बाद ही किसी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना को खत्म करना था।
ड्रेस कोड में सख्ती, ज्वैलरी पर पूरी रोक
परीक्षा के दौरान ड्रेस कोड को लेकर भी कड़े नियम लागू किए गए। किसी भी प्रकार की ज्वैलरी, धागा, पिन, चेन या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इस सख्ती का असर यह रहा कि कई महिला अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के बाहर ही अपने मंगलसूत्र, चूड़ियां और कान के टॉप्स तक उतारने पड़े। इससे परीक्षा व्यवस्था की सख्ती साफ दिखाई दी।
रोडवेज में मुफ्त यात्रा से मिली राहत
अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए राजस्थान रोडवेज द्वारा किराया मुक्त यात्रा की सुविधा भी दी गई थी। इससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में राहत मिली।
व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था
परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया था। परीक्षा समन्वयक एवं एडीएम रामरतन सोकरिया के अनुसार—
- एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया
- 7 सतर्कता दल तैनात किए गए
- 67 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए
- पेपर कॉर्डिनेटर की विशेष निगरानी रखी गई
इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य परीक्षा में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना था।
आगे की परीक्षा कार्यक्रम
पहले दिन परीक्षा एक ही पारी में आयोजित की गई। वहीं, अगले दिन यानी 10 मई को परीक्षा दो पारियों में आयोजित की जाएगी। टोंक में आयोजित यह परीक्षा इस बार अपनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासित प्रक्रिया के कारण चर्चा में रही। बायोमैट्रिक जांच, ड्रेस कोड की सख्ती और समय से पहले गेट बंद होने जैसी व्यवस्थाओं ने परीक्षा को पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की।