“CM अटैक केस में बड़ा मोड़! ‘मामला इतना आसान नहीं’—हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जानिए पूरा मामला”

निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने पहुंचे आरोपी, लेकिन हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने केस को नया मोड़ दे दिया… अब आगे क्या होगा?

Apr 11, 2026 - 09:58
Apr 11, 2026 - 09:59
“CM अटैक केस में बड़ा मोड़! ‘मामला इतना आसान नहीं’—हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जानिए पूरा मामला”

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस केस में अब नया मोड़ तब आया, जब आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत का रुख सख्त नजर आया, जिससे साफ हो गया कि मामला इतना सरल नहीं है जितना बचाव पक्ष पेश करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 20 अगस्त 2025 की है, जब मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास पर लोगों की समस्याएं सुन रही थीं। इसी दौरान अचानक एक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया।

मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया, लेकिन बाद में जांच में एक और व्यक्ति का नाम सामने आया, जिस पर साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने की।

सुनवाई के दौरान उन्होंने साफ कहा कि:

“मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता”

किसी व्यक्ति की गर्दन की जुगुलर नस पर हल्का दबाव भी जानलेवा हो सकता है

उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ यह कहना कि चोट सामान्य थी, पूरे मामले को कमजोर नहीं बनाता।

आरोपियों की दलील

आरोपियों राजेशभाई और तहसीन रजा शेख की ओर से कोर्ट में कहा गया कि:

हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं

मेडिकल रिपोर्ट में चोट सामान्य बताई गई है

FIR में शुरुआत में हत्या के प्रयास की धारा शामिल नहीं थी

वकीलों का यह भी कहना था कि गला दबाने जैसी कोई घटना नहीं हुई।

साजिश के आरोप पर सवाल

तहसीन रजा शेख के वकील ने कहा कि:

वह घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं था

उसे सिर्फ 2000 रुपये ट्रांसफर करने के आधार पर आरोपी बनाया गया

उन्होंने इसे कमजोर आधार बताते हुए आरोपों को खारिज करने की मांग की।

निचली अदालत का फैसला

इससे पहले तीस हजारी कोर्ट ने दोनों आरोपियों के खिलाफ:

हत्या की कोशिश

आपराधिक साजिश

सरकारी कार्य में बाधा

जैसे गंभीर आरोप तय किए थे। अदालत ने माना था कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

आगे क्या?

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए समय दिया है।

अगली सुनवाई: 15 अप्रैल

तब तक मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा

Kashish Sain Bringing truth from the ground