कुख्यात डकैत धनसिंह के गिरोह का नेटवर्क मध्य प्रदेश तक: जयपुर के गुर्गे ने हैंडग्रेनेड और हथियार मुहैया कराए, रिमांड पर दो साथियों के नाम उगले
कुख्यात डकैत धनसिंह की रिमांड पर पूछताछ में जयपुर के शिवसिंह और भिनाय के अर्जुन सिंह के नाम उगले; शिवसिंह ने हैंडग्रेनेड व हथियार मुहैया कराए, गिरोह का नेटवर्क एमपी तक फैला, दोनों गुर्गों की गिरफ्तारी जल्द।
अजमेर, 7 नवंबर 2025:
राजस्थान के कुख्यात डकैत धनसिंह के गिरोह का नेटवर्क न केवल राज्य के भीतर बल्कि पड़ोसी मध्य प्रदेश तक फैला हुआ था। पुलिस ने धनसिंह को रिमांड पर लेने के बाद उससे पूछताछ की, जिसमें उसने अपने दो प्रमुख गुर्गों के नाम उगल दिए। इनमें से एक गुर्गा जयपुर के नरेना थाना क्षेत्र का निवासी शिवसिंह है, जिसने धनसिंह को हैंडग्रेनेड सहित अन्य घातक हथियार उपलब्ध कराए थे। दूसरा गुर्गा भिनाय का अर्जुन सिंह है। पुलिस का दावा है कि दोनों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह खुलासा एक बड़ी साजिश को उजागर करता है, जिसमें धनसिंह हथियार जमा करके किसी बड़े अपराध को अंजाम देने की फिराक में था।
गिरोह का विस्तार और हथियारों की आपूर्ति; धनसिंह का गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसका जाल राजस्थान से आगे मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों तक फैला हुआ था। पूछताछ के दौरान धनसिंह ने कबूला कि शिवसिंह ने उसे हैंडग्रेनेड, पिस्टल और अन्य हथियार मुहैया कराए थे। शिवसिंह जयपुर के नरेना क्षेत्र में रहता है और हथियारों की आपूर्ति का प्रमुख कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, शिवसिंह को ये हथियार कहां से मिले, इसकी पूरी परतें अभी खुली नहीं हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया, "शिवसिंह की गिरफ्तारी के बाद ही हथियारों के स्रोत का खुलासा होगा। हम संदेह कर रहे हैं कि यह आपूर्ति किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।" दूसरी ओर, अर्जुन सिंह भिनाय (अजमेर) का निवासी है और धनसिंह के गिरोह में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों गुर्गों की तलाश में पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं। एसपी (अजमेर ग्रामीण) ने कहा, "हमारे पास दोनों के ठिकानों की पूरी जानकारी है। 48 घंटों के अंदर उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा।"
धनसिंह की गिरफ्तारी: डेढ़ साल की फरारी का अंत धनसिंह को 1 नवंबर 2025 की रात को पिपरौली के पास विशेष पुलिस अभियान में गिरफ्तार किया गया था। वह डेढ़ साल से फरार चल रहा था और उसके सिर पर 35,000 रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई थी, जो एक बड़ी वारदात की योजना का संकेत दे रही थी। पुलिस को पहले से ही अंदेशा था कि धनसिंह कोई बड़ा कांड करने की साजिश रच रहा था, इसलिए सतर्कता बरती जा रही थी।एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "धनसिंह का गिरोह हत्या, लूट, डकैती और जमीन हड़पने जैसे अपराधों में लिप्त था। हमारी टीम ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर उसे घेरा। गिरफ्तारी के बाद उसके नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।"
आपराधिक इतिहास: 51 मामलों में फंसा, 20 में बरी धनसिंह पर कुल 51 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो उसके लंबे अपराधी जीवन की गवाही देते हैं। इनमें हत्या, लूटपाट, डकैती, जमीन हड़पने और अन्य संगीन अपराध शामिल हैं। खास बात यह है कि 51 मामलों में से 20 में वह पहले ही बरी हो चुका है, लेकिन बाकी मामलों में वह वांछित था। उसके गिरोह ने ग्रामीण इलाकों में दहशत का राज कायम किया था, खासकर अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक के आसपास। मध्य प्रदेश से जुड़े नेटवर्क से संकेत मिलता है कि गिरोह ने सीमापार विस्तार की कोशिश की थी, शायद हथियारों और लूट के लिए।