कलेक्टर मैडम अब याद रखेंगी ‘नेम और नेमप्लेट’! आखिर ‘डीग जिला’ कैसे पहुंच गया राजस्थान से बाहर? जानिए पूरा मामला
अलवर की एक हाई-लेवल मीटिंग में नेमप्लेट को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक बड़ा मोड़ ले लेता है। जिला प्रमुख को बाहर जाने के आदेश से लेकर अंदर चल रही सियासी हलचल तक पूरा मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। आखिर इस ‘नेमप्लेट विवाद’ के पीछे असली कहानी क्या है?
राजस्थान में इस समय राजनीति, प्रशासन और समाज से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। कहीं मीटिंग में नेमप्लेट विवाद चर्चा में है, तो कहीं धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों ने सियासत को गर्म कर दिया है। वहीं अस्पताल में लापरवाही और विदेश में राजस्थानी संस्कृति का बढ़ता आकर्षण भी सुर्खियों में है।
अलवर में ‘नेमप्लेट’ विवाद से उठा सियासी तूफान
अलवर के मिनी सचिवालय में आयोजित एक बड़ी मीटिंग में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब जिला प्रमुख को उनकी सीट पर नेमप्लेट नहीं मिली। बताया गया कि मीटिंग में केंद्रीय मंत्री, मुख्य सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। नेमप्लेट न मिलने पर जिला प्रमुख को बाहर जाने को कहा गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाद में केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभाली गई। इस घटना ने प्रशासनिक गरिमा और तालमेल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भैराणा धाम में सियासी हलचल तेज
जयपुर के भैराणा धाम में संतों और समर्थकों की भारी भीड़ के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली। इस दौरान कई मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को घेरा गया। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के वहां पहुंचने और संतों से मुलाकात के बाद माहौल और गरमा गया। समर्थकों की भीड़ और नारों के बीच यह आयोजन राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल गया।
डीग अस्पताल में मरीज के साथ विवादित व्यवहार
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में डीग से आए एक मरीज के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि जांच के नाम पर मरीज से अवैध रूप से पैसे लिए गए और उसके क्षेत्र को लेकर विवादित टिप्पणी की गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
स्वीडन का ‘डॉन’ बना राजस्थानी संस्कृति का दीवाना
नाइजीरिया के एलेमा रॉयल फैमिली से जुड़े और स्वीडन में रहने वाले सिंगर प्रिंस डॉन एलेमा राजस्थान की संस्कृति और लोकगीतों के बड़े प्रशंसक बन गए हैं। वे ‘हरियाला बन्ना’, ‘केसरिया बालम’ और बाबा रामदेव के भजन तक गाते हैं। उनका कहना है कि राजस्थान की भाषा, संस्कृति और संगीत ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उनकी राजस्थानी गायकी को सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है।