NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड कौन? महाराष्ट्र से जयपुर तक फैला नेटवर्क, CBI जांच में खुलने लगे बड़े राज़!
NEET-UG पेपर लीक मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—आखिर इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है?
जयपुर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे देश को हिला देने वाले नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सिर्फ एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका दायरा महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान समेत कई राज्यों तक फैला हुआ था।
महाराष्ट्र से शुरू होकर जयपुर तक पहुंचा पेपर
अब तक की जांच में सामने आया है कि लीक हुआ पेपर सबसे पहले महाराष्ट्र के पुणे और नासिक में पहुंचा। इसके बाद यह हरियाणा के गुरुग्राम होते हुए राजस्थान की राजधानी जयपुर तक लाया गया, जहां इसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है। इस पूरे रैकेट में कोचिंग नेटवर्क, एजेंट और कई लोकल ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
‘प्राइवेट माफिया’ WhatsApp ग्रुप का खुलासा
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘प्राइवेट माफिया’ नाम के एक वॉट्सऐप ग्रुप का है, जिसमें करीब 400 सदस्य जुड़े हुए थे। इस ग्रुप के जरिए कथित तौर पर गेस पेपर और लीक सामग्री साझा की जाती थी।
एजेंसियों के अनुसार, इस ग्रुप में जो प्रश्न भेजे गए थे, उनमें से कई सवाल असली NEET परीक्षा में हूबहू मेल खाते पाए गए हैं। खासकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री के प्रश्नों में भारी समानता ने जांच को और गंभीर बना दिया है।
CBI ने संभाली जांच, कई राज्यों में छापेमारी की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है। दिल्ली में CBI ने FIR दर्ज कर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है।
सीबीआई की टीम ने जयपुर स्थित SOG मुख्यालय पहुंचकर अब तक जुटाए गए दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और संदिग्धों को अपने कब्जे में लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों में एक साथ छापेमारी हो सकती है।
मास्टरमाइंड और गिरफ्तारियां
राजस्थान SOG ने इस मामले में मनीष यादव को मास्टरमाइंड बताया है, जिसे जयपुर से हिरासत में लिया गया है। उसके साथ राकेश मंडावरिया समेत कई अन्य लोगों को भी पकड़ा गया है, जिन पर पेपर को अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है।
इसके अलावा जांच में कोचिंग सेंटर, एजुकेशन कंसल्टेंसी और हॉस्टल नेटवर्क की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
गेस पेपर और 150 पेज का दस्तावेज
जांच में यह भी सामने आया कि ‘गेस पेपर’ के नाम पर करीब 150 पेज का दस्तावेज वायरल हुआ था, जिसमें 410 प्रश्न शामिल थे। इनमें से बड़ी संख्या में सवाल असली परीक्षा में भी पूछे गए। इससे साफ संकेत मिले कि पेपर पहले से ही सिस्टम के भीतर लीक हो चुका था।
22 लाख छात्रों पर असर
इस पूरे मामले का सीधा असर देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा से छात्रों और अभिभावकों में भारी असमंजस और नाराजगी है।
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है और इसमें कितने बड़े स्तर पर आर्थिक लेन-देन हुआ है।