NEET एग्जाम रद्द: बिहार में 60 लाख में मेडिकल सीट की डील, MBBS छात्र निकला मास्टरमाइंड
NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के पीछे बिहार के सॉल्वर गैंग, 60 लाख में सीट की डील, MBBS छात्र मास्टरमाइंड और राजस्थान में मिले संदिग्ध गेस पेपर का बड़ा खुलासा सामने आया है। NTA ने केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया है।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 अब विवादों के घेरे में आ चुकी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने 3 मई को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा है कि केंद्र सरकार की मंजूरी और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया गया है। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित होगी।
इस फैसले के पीछे बिहार में सक्रिय सॉल्वर गैंग, करोड़ों के खेल, फर्जी अभ्यर्थियों और राजस्थान में मिले संदिग्ध गेस पेपर जैसे कई गंभीर खुलासे सामने आए हैं। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता हुआ है, जिसके बाद NTA को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
बिहार में ऐसे खुला सॉल्वर गैंग का नेटवर्क
पूरा मामला बिहार के नालंदा जिले से सामने आया। 2 मई की रात पावापुरी थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान दो लग्जरी गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। शक होने पर पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों वाहनों को पकड़ लिया।
गाड़ियों से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS सेकेंड ईयर छात्र अवधेश कुमार भी शामिल था। पुलिस ने जब वाहनों की तलाशी ली तो डैशबोर्ड के नीचे से नोटों की गड्डियां बरामद हुईं।
हालांकि असली खुलासा मोबाइल फोन की जांच में हुआ। पुलिस को फोन से NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट और पैसों के लेन-देन के सबूत मिले। यहीं से सामने आया कि एक संगठित गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सॉल्वर बैठाने की तैयारी कर रहा था।
50 से 60 लाख रुपए में होती थी डील
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह NEET परीक्षा में पास कराने के लिए एक कैंडिडेट से 50 से 60 लाख रुपए तक वसूलता था। शुरुआत में 1.5 से 2 लाख रुपए एडवांस लिए जाते थे। इसके बाद असली छात्र की जगह परीक्षा केंद्र पर किसी दूसरे व्यक्ति यानी “सॉल्वर” को बैठाने की योजना बनाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय था और पूरे नेटवर्क में कई जिलों के लोग शामिल थे।
MBBS छात्र निकला मास्टरमाइंड
गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर का अवधेश कुमार, मोतिहारी का अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार साह शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज का 2022 बैच का छात्र बताया जा रहा है। अमन कुमार सिंह उसका मौसेरा भाई है और दोनों हॉस्टल में साथ रहते थे। पुलिस के अनुसार उज्जवल पर पहले से CBI के केस दर्ज हैं। फिलहाल वह फरार है और उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
कई जिलों में छापेमारी, 7 आरोपी गिरफ्तार
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद नालंदा साइबर डीएसपी ने मुजफ्फरपुर पुलिस को अलर्ट भेजा। इसके बाद औरंगाबाद, जमुई और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में छापेमारी की गई। मुजफ्फरपुर के जिला स्कूल और मुखर्जी सेमिनरी परीक्षा केंद्र से भी कुछ परीक्षार्थियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। इस पूरे मामले में अब तक कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में सीतामढ़ी के एक डॉक्टर का बेटा हर्षराज, मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह परीक्षा में सॉल्वर बैठाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरा नेटवर्क खुल गया।
राजस्थान में मिले हाथ से लिखे गेस पेपर
बिहार के बाद राजस्थान से भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने 10 मई को देहरादून, सीकर और झुंझुनू से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया। जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले छात्रों तक हाथ से लिखे गए सवाल पहुंचाए गए थे। दावा है कि परीक्षा के 720 में से करीब 600 नंबर के सवाल इन गेस पेपर से मैच कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा एक छात्र 1 मई को यह प्रश्न सीकर में अपने दोस्त को भेजता है। इसके बाद यही प्रश्न अलग-अलग छात्रों तक पहुंचाए गए।
150 सवाल हूबहू मैच होने का दावा
SOG जांच में सामने आया है कि छात्रों को जो “क्वेश्चन बैंक” मिला था, उसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे। ये सभी सवाल हाथ से लिखे हुए थे और उनकी हैंडराइटिंग भी एक जैसी बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 150 सवाल हूबहू NEET UG 2026 के असली पेपर में आए। हालांकि SOG अभी यह जांच कर रही है कि इसे पेपर लीक माना जाए या केवल गेस पेपर। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी गेस पेपर से कुछ सवाल मैच हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सवालों का समान होना सामान्य नहीं माना जाता।
क्यों रद्द हुई NEET UG 2026 परीक्षा?
NTA के अनुसार 8 मई से ही इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं होगा।
एजेंसी ने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए NEET UG 2026 को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है।
छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा
NTA ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा। पुराने परीक्षा केंद्रों में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। री-एग्जाम के लिए नए एडमिट कार्ड जारी होंगे और छात्रों की फीस भी वापस की जाएगी।
2024 में भी उठे थे पेपर लीक के सवाल
यह पहली बार नहीं है जब NEET परीक्षा विवादों में आई हो। 2024 में भी पेपर लीक के आरोप लगे थे। बिहार और झारखंड में जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां हुई थीं। हालांकि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था और केवल कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई थी। उस दौरान 67 छात्रों को 720 में से 720 अंक मिलने और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स आने पर भी बड़ा विवाद हुआ था।
अब सबसे बड़ा सवाल
NEET UG 2026 रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्र असमंजस में हैं। छात्रों और अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हर साल इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा में सेंध कैसे लग जाती है?
क्या इस बार जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का खुलासा कर पाएंगी?
क्या पेपर लीक और सॉल्वर गैंग पर सख्त कार्रवाई होगी?
और सबसे अहम — क्या मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा फिर से बहाल हो पाएगा?
फिलहाल जांच जारी है और देशभर की नजर अब NTA, जांच एजेंसियों और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।