राजस्थान के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा होगी अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में लागू किया जाए। कोर्ट ने इसे मातृभाषा आधारित शिक्षा और NEP 2020 के अनुरूप बताते हुए 30 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।

May 12, 2026 - 14:02
राजस्थान के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा होगी अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने इस पूरे मामले में 30 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

यह आदेश तीन जजों की पीठ ने दिया, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई शामिल थे। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजस्थान सरकार को ऐसी ठोस और प्रभावी नीति बनानी होगी, जिससे स्कूलों में राजस्थानी भाषा को उचित स्थान मिल सके और छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा का अवसर प्राप्त हो।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के प्रावधानों और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP 2020) का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। इससे न केवल उनकी समझने की क्षमता बढ़ती है, बल्कि उनका सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

याचिका में यह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया था कि राजस्थान में लाखों लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं, लेकिन इसे शिक्षा व्यवस्था में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि शिक्षक भर्ती परीक्षा (REET) और स्कूल पाठ्यक्रम में भी राजस्थानी भाषा को उचित स्थान नहीं मिलने का दावा किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में होना उनके बौद्धिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय भाषा में शिक्षा मिलने से बच्चे बेहतर तरीके से सीख पाते हैं और विषयों को गहराई से समझते हैं।

इस आदेश के बाद अब राजस्थान सरकार पर जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह स्कूल शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव करे और तय समय सीमा के भीतर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपे।

यह फैसला न केवल राजस्थान की शिक्षा नीति को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को भी एक नया मंच प्रदान कर सकता है।

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