CM बनते ही स्टालिन के घर क्यों पहुंचे विजय? तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल, मुलाकात के कई मायने

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने पद संभालने के बाद पूर्व सीएम एमके स्टालिन से मुलाकात कर सियासी अटकलों को तेज कर दिया है। हाल ही में दोनों नेताओं के बीच वित्तीय मुद्दों पर तीखी बयानबाजी हुई थी, ऐसे में यह मुलाकात तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत मानी जा रही है।

May 11, 2026 - 15:19
CM बनते ही स्टालिन के घर क्यों पहुंचे विजय? तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल, मुलाकात के कई मायने

तमिलनाडु की राजनीति में एक नई हलचल उस समय देखने को मिली जब राज्य के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने पद संभालने के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के दम पर ऐतिहासिक जीत हासिल की और लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति पर कब्जा रखने वाली द्रविड़ पार्टियों को बड़ा झटका दिया। विजय की जीत ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के राजनीतिक समीकरण बदल दिए। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका सीधे स्टालिन के घर पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस स्टालिन और उनकी पार्टी को विजय ने चुनाव में कड़ी चुनौती देकर सत्ता से बाहर किया, आखिर उन्हीं से मिलने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि इस मुलाकात को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे तमिलनाडु की भविष्य की राजनीति के लिए अहम संकेत मान रहे हैं।

दरअसल, विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बड़ी राजनीतिक मुलाकात थी। बताया जा रहा है कि चेन्नई स्थित स्टालिन के आवास पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विजय अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया।

इस मुलाकात की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच आर्थिक मुद्दों को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने आरोप लगाया था कि पिछली डीएमके सरकार राज्य का खजाना खाली छोड़कर गई है और तमिलनाडु पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। विजय ने कहा था कि उनकी सरकार को आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।

विजय के इन आरोपों पर स्टालिन ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में पैसों की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत कुशल प्रशासन की है। स्टालिन ने यह भी कहा कि सरकार चलाना केवल प्रचार करने से कहीं ज्यादा मुश्किल होता है।

दोनों नेताओं के बीच चली इस सियासी बयानबाजी के बाद अचानक हुई मुलाकात ने तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाओं को हवा दे दी है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे केवल लोकतांत्रिक शिष्टाचार मान रहे हैं, जबकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि विजय आने वाले समय में विपक्ष के साथ टकराव के बजाय संतुलन की राजनीति करना चाहते हैं।

तमिलनाडु में लंबे समय बाद ऐसी सरकार बनी है जो पारंपरिक द्रविड़ दलों से बाहर है। यही वजह है कि विजय पर जनता की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विजय ने कहा था कि उनकी सरकार सेकुलरिज्म, सामाजिक न्याय और जन-केंद्रित शासन को प्राथमिकता देगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते, बल्कि जनता के समर्थन से इस पद तक पहुंचे हैं।

दूसरी तरफ डीएमके अब विपक्ष की भूमिका में नजर आएगी। पार्टी ने उधयनिधि स्टालिन को विपक्ष का नेता बनाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल विजय और स्टालिन की यह मुलाकात राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह केवल राजनीतिक शिष्टाचार था या फिर भविष्य की किसी बड़ी रणनीति की शुरुआत।

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