कर्नल बैंसला की मूर्ति लगाने पर अड़ा गुर्जर समाज: देर रात शहीद स्थल पर पहुंचाईं प्रतिमाएं, भारी पुलिस जाब्ता तैनात
रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित कुशालीपुरा शहीद स्थल पर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और अन्य शहीदों की मूर्तियां स्थापित करने को लेकर गुर्जर समाज और प्रशासन के बीच तनातनी बढ़ गई है।
सवाई माधोपुर जिले के रणथंभौर टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) क्षेत्र में स्थित कुशालीपुरा शहीद स्थल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों की स्मृति में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और दो अन्य शहीदों की मूर्तियां स्थापित करने को लेकर क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
शनिवार को गुर्जर समाज के लोग शहीद स्थल पर एकत्रित होकर विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मूर्ति स्थापना की तैयारी में जुटे रहे। गुर्जर नेता विजय सिंह बैंसला के भी कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में समाज के लोग मौके पर पहुंचे।
पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति स्थापना की तैयारी
गुर्जर समाज की ओर से आयोजित तीन दिवसीय भगवान देवनारायण मेला एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दूसरे दिन मूर्ति स्थापना को लेकर गतिविधियां तेज रहीं। सुबह से ही श्रद्धालु और समाज के लोग शहीद स्थल पर जुटने लगे।
मौके पर हवन, पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की गईं। समाज के लोगों का कहना है कि कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने गुर्जर समाज के अधिकारों और आरक्षण आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसलिए उनकी प्रतिमा शहीद स्थल पर स्थापित की जानी चाहिए।
देर रात पहुंचाई गईं मूर्तियां
शुक्रवार देर रात करीब 10:30 बजे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और अन्य शहीदों की मूर्तियां कुशालीपुरा शहीद स्थल पर पहुंचा दी गई थीं। मूर्तियों को निर्धारित स्थान पर रखा गया और सुरक्षा कारणों से उन्हें कपड़े से ढक दिया गया।
मूर्तियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में समाज के लोग मौके पर एकत्रित हो गए और कर्नल बैंसला के समर्थन में नारेबाजी भी की गई।
प्रशासन और समाज के बीच बना गतिरोध
मूर्ति स्थापना को लेकर शुक्रवार को गुर्जर समाज और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
गुर्जर समाज का स्पष्ट कहना है कि मूर्तियां और स्मारक उसी स्थान पर स्थापित किए जाएंगे जहां आरक्षण आंदोलन के दौरान समाज के लोग शहीद हुए थे। वहीं प्रशासन का तर्क है कि यह क्षेत्र रणथंभौर टाइगर रिजर्व के संरक्षित क्षेत्र में आता है, जहां स्थायी निर्माण कार्य या स्मारक निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती।
प्रशासन की ओर से समाज को वैकल्पिक स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया गया है, लेकिन समाज के लोग अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
भाजपा नेताओं ने की समझाइश
स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के प्रयास में शुक्रवार देर रात खंडार विधायक जितेंद्र गोठवाल और भाजपा जिलाध्यक्ष मानसिंह गुर्जर भी कुशालीपुरा पहुंचे।
दोनों नेताओं ने समाज के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की। हालांकि देर रात तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं।
सवाई माधोपुर, करौली और दौसा जिलों से करीब 1000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
शहीद स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल, विशेष सुरक्षा दल और निगरानी टीमें तैनात की गई हैं।
क्या है पूरा विवाद?
कुशालीपुरा क्षेत्र गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है। आंदोलन के दौरान यहां समाज के कई लोग शहीद हुए थे। इसके बाद से गुर्जर समाज लगातार इस स्थान को शहीद स्थल के रूप में विकसित करने और स्मारक निर्माण की मांग करता रहा है।
हालांकि यह क्षेत्र रणथंभौर टाइगर रिजर्व के संरक्षित वन क्षेत्र में आता है, जिसके कारण यहां किसी प्रकार के स्थायी निर्माण को लेकर कानूनी और पर्यावरणीय प्रतिबंध मौजूद हैं।
इसी कारण प्रशासन और वन विभाग स्मारक निर्माण तथा मूर्ति स्थापना को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
कर्नल बैंसला का समाज में विशेष महत्व
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला गुर्जर आरक्षण आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने वर्षों तक गुर्जर समाज के आरक्षण और अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया था।
समाज के लोगों का मानना है कि कर्नल बैंसला ने गुर्जर समुदाय की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया, इसलिए उनकी प्रतिमा शहीद स्थल पर स्थापित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।
प्रशासन की नजर, समाज का इंतजार
फिलहाल कुशालीपुरा शहीद स्थल पर माहौल पूरी तरह संवेदनशील बना हुआ है। एक ओर गुर्जर समाज मूर्ति स्थापना को लेकर अपने निर्णय पर कायम है, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सतर्क है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और समाज के बीच सहमति बनती है या यह विवाद आगे और गहराता है।