आंदोलन स्थगित, लेकिन मांगें बरकरार; भैराणा धाम पर नया अध्याय शुरू..जानिए क्या नया मोड़ आया!

जयपुर के भैराणा स्थित संत दादूदयाल की पावन तपोस्थली के संरक्षण को लेकर चल रहा आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। संत समाज ने प्रशासन के साथ हुई सकारात्मक वार्ता और सरकार के आश्वासनों के बाद संवाद के जरिए समाधान निकालने का निर्णय लिया है।

Jun 1, 2026 - 15:42
आंदोलन स्थगित, लेकिन मांगें बरकरार; भैराणा धाम पर नया अध्याय शुरू..जानिए क्या नया मोड़ आया!

जयपुर जिले के भैराणा स्थित संत दादूदयाल की लगभग 500 वर्ष पुरानी पावन तपोस्थली के संरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलन में बड़ा मोड़ आ गया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत संत समाज ने फिलहाल आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया है। श्री दादूपालक भैराणा धाम संघर्ष समिति ने प्रेस नोट जारी कर इसकी जानकारी दी और कहा कि प्रशासन तथा राज्य सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अब संवाद और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

5 अप्रैल से शुरू हुआ था आंदोलन

संत दादूदयाल की ऐतिहासिक तपोस्थली के संरक्षण और क्षेत्र की धार्मिक एवं पर्यावरणीय पहचान को बचाने की मांग को लेकर 5 अप्रैल से आंदोलन शुरू किया गया था। आंदोलन के दौरान संत समाज ने अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

करीब 10 दिन बाद, 15 अप्रैल से संतों ने कठोर अनशन शुरू कर दिया था। इसके बाद यह आंदोलन प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया था और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा था।

प्रशासन के साथ हुई सकारात्मक वार्ता

संघर्ष समिति के अनुसार 26 मई को जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद जिला कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सकारात्मक माहौल में वार्ता हुई।

समिति का कहना है कि बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी और प्रशासन ने समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का भरोसा दिलाया। इसी के आधार पर संत समाज ने आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद के रास्ते को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

अभी पूरी तरह नहीं सुलझा मामला

हालांकि संत समाज ने स्पष्ट किया है कि विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रशासन द्वारा 27 मई को कुछ बिंदुओं पर व्यावहारिक समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इन प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

समिति का कहना है कि प्रशासन की ओर से RIICO को हटाने और एक विशेष समिति के गठन जैसे प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन इन प्रस्तावों का स्वरूप, अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

संत समाज ने जताई नाराजगी

आंदोलन के दौरान कुछ राजनीतिक और नकारात्मक टिप्पणियों को लेकर संत समाज ने असहमति भी जताई है। समिति ने कहा कि आंदोलन को लेकर की गई कुछ बयानबाजियां संत समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं थीं और उनका विरोध किया जाता है।

संतों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए चलाया जा रहा है।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन की मांग

संघर्ष समिति ने दोहराया कि उसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है। समिति चाहती है कि विकास योजनाओं और धार्मिक-पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।

संत समाज का मानना है कि भैराणा धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए यहां होने वाले किसी भी विकास कार्य में इन पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर जताया भरोसा

समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार संत समाज और धार्मिक परंपराओं के प्रति संवेदनशील है। मुख्यमंत्री स्वयं धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों की गहरी समझ रखते हैं और उम्मीद है कि वे इस मामले में संतुलित एवं सकारात्मक निर्णय लेंगे।

समिति ने कहा कि सरकार से उन्हें आशा है कि दादूपालकों, भैराणा धाम और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकाला जाएगा।

आगे क्या?

फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन संत समाज प्रशासन के साथ आगे भी वार्ता जारी रखेगा। आने वाले दिनों में यदि सरकार और प्रशासन की ओर से स्पष्ट एवं संतोषजनक समाधान सामने आता है तो विवाद का स्थायी समाधान संभव हो सकता है। वहीं यदि संतों की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को फिर से शुरू करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

Web Desk Web Desk The Khatak