राज्यसभा की 27 और विधान परिषद की 17 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया शुरू
निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 27 और विधान परिषद की 17 सीटों पर चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्यसभा की 27 और विधान परिषद की 17 सीटों पर चुनाव का बिगुल, 18 जून को मतदान
नई दिल्ली। देश में राज्यसभा और विधान परिषद की रिक्त सीटों को भरने के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्यसभा की 27 सीटों और विधान परिषद (MLC) की 17 सीटों पर चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही सोमवार से नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी, जबकि उम्मीदवार 11 जून तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 18 जून को कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव
इस चुनाव में देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं। इन सीटों पर राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण चुनाव कराए जा रहे हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में राज्यसभा की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा। इस प्रकार कुल 27 राज्यसभा सीटों पर मतदान होगा।
बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव
राज्यसभा चुनावों के साथ-साथ विधान परिषद की 17 सीटों के लिए भी चुनाव होंगे।
- बिहार में 9 विधान परिषद सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होंगे।
- बिहार की ही 1 सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा।
- कर्नाटक में 7 विधान परिषद सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव संपन्न होंगे।
इन चुनावों के जरिए राज्य विधान परिषदों में रिक्त पदों को भरा जाएगा।
चुनाव कार्यक्रम एक नजर में
| प्रक्रिया | तिथि |
|---|---|
| अधिसूचना जारी | 1 जून |
| नामांकन शुरू | 1 जून |
| नामांकन की अंतिम तिथि | 8 जून |
| नामांकन पत्रों की जांच | 9 जून |
| नाम वापसी की अंतिम तिथि | 11 जून |
| मतदान | 18 जून |
| मतगणना | 18 जून |
राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। कई राज्यों में राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक समीकरणों पर नजर रहेगी, जबकि विधान परिषद चुनावों में भी दलों की ताकत का परीक्षण होगा।
इन चुनावों के नतीजे आगामी राजनीतिक समीकरणों और संसद के उच्च सदन में दलों की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।