ममता बनर्जी का बड़ा फैसला: फर्जी हस्ताक्षर मामले में TMC के दो विधायक सस्पेंड

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है।

Jun 1, 2026 - 16:54
ममता बनर्जी का बड़ा फैसला: फर्जी हस्ताक्षर मामले में TMC के दो विधायक सस्पेंड

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर अंदरूनी विवादों को लेकर सुर्खियों में है। पार्टी नेतृत्व ने उलुबेरिया पूर्व से विधायक ऋतोब्रता बनर्जी और एंटाली से विधायक संदीपन साहा को संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और भी खुलकर सामने आने लगे हैं।

निष्कासन के बाद संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में उन लोगों के हस्ताक्षर शामिल किए गए, जो कथित रूप से संबंधित बैठक में मौजूद ही नहीं थे। साहा का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर अनियमितता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

संदीपन साहा ने इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, जिस सूची और प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए गए, उसकी सत्यता और वैधता की जांच करना महासचिव के तौर पर अभिषेक बनर्जी की जिम्मेदारी थी। साहा का आरोप है कि सूची में कई तरह की त्रुटियां थीं, जिनकी समय रहते जांच नहीं की गई।

विवाद की जड़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव से जुड़ी बताई जा रही है। कुछ समय पहले विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि संदीपन साहा और ऋतोब्रता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत सौंपी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नेता प्रतिपक्ष के चुनाव से संबंधित प्रस्ताव में कई प्रक्रियागत खामियां और दस्तावेजी गड़बड़ियां मौजूद थीं।

इस घटनाक्रम ने ऐसे समय में तूल पकड़ा है, जब तृणमूल कांग्रेस पहले से कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की घटना सामने आई थी। इसके अगले ही दिन सांसद कल्याण बनर्जी के साथ भी विवाद और हमले की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो विधायकों के निष्कासन और उसके बाद लगाए गए आरोप केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की ओर भी संकेत करते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है और संगठन के भीतर उठ रहे सवालों को किस तरह संभालती है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ पार्टी नेतृत्व अनुशासन बनाए रखने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ निष्कासित विधायक संगठन के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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