बाड़मेर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 1.46 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों को जलाकर किया नष्ट
बाड़मेर जिले में पुलिस ने 36 एनडीपीएस मामलों में जब्त 1.46 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों—including 4.48 क्विंटल डोडा पोस्त, 345 ग्राम स्मैक और अन्य ड्रग्स—को कोर्ट आदेश पर फायरिंग रेंज में जलाकर नष्ट किया। एसपी नरेंद्र सिंह मीना के नेतृत्व में यह कार्रवाई सात थानों से जुड़े मामलों की थी, जिससे मालखानों में जगह उपलब्ध हुई।
बाड़मेर (राजस्थान): जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभिन्न पुलिस थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज 36 मामलों में जब्त किए गए भारी मात्रा में मादक पदार्थों को पुलिस ने फायरिंग रेंज में जलाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया। इन नशीले पदार्थों की कुल अनुमानित बाजार कीमत 1.46 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस निस्तारण अभियान में मुख्य रूप से शामिल नशीले पदार्थों की मात्रा इस प्रकार है:4.48 क्विंटल डोडा पोस्त (खसखस का नशीला पदार्थ),345.62 ग्राम स्मैक (हेरोइन),90 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन या सिंथेटिक ड्रग),15 किलो 504 ग्राम नशीला पाउडर,853 नशीली टैबलेट,233 इंजेक्शन।ये सभी पदार्थ जिले के सात विभिन्न थानों से संबंधित मामलों में जब्त किए गए थे। थानों के अनुसार मामलों का विवरण निम्नलिखित है:धोरीमन्ना थाना: 11 मामले,रागेश्वरी थाना: 8 मामले,नागाणा थाना: 6 मामले,धनाऊ थाना: 4 मामले,शिव थाना: 3 मामले,बाखासर थाना: 2 मामले,रीको और गिराब थाना: 1-1 मामला।एसपी नरेंद्र सिंह मीना के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी की कड़ी निगरानी में यह पूरा निस्तारण किया गया। सबसे पहले सभी मादक पदार्थों का इलेक्ट्रिक कांटे से सटीक वजन किया गया। इसके बाद पुलिस फायरिंग रेंज में तेल और लकड़ियों की मदद से इन्हें पूरी तरह जलाकर राख कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई ताकि कोई विवाद न हो।एसपी मीना ने आगे कहा कि थानों के मालखानों में लंबे समय से जमा इन पुराने जब्त नशीले पदार्थों के निस्तारण से अब मालखानों में पर्याप्त जगह उपलब्ध हो गई है। इससे भविष्य में नई कार्रवाइयों में जब्त होने वाले नशीले पदार्थों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा।
यह कार्रवाई बाड़मेर पुलिस की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। जिले में सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नशीली दवाओं की तस्करी की समस्या गंभीर रही है, लेकिन पुलिस की सतत मुहिम से ऐसे मामलों में कमी आ रही है। इससे न केवल नशे का कारोबार प्रभावित होता है, बल्कि युवा पीढ़ी को इस खतरे से बचाने में भी मदद मिलती है।