बाड़मेर में कालबेलिया समाज का प्रदर्शन: शव लेकर रेलवे स्टेशन जा रहे परिजनों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की, अंततः वन विभाग की जमीन पर हुआ अंतिम संस्कार
बाड़मेर में कालबेलिया समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार के लिए आवंटित जमीन पर भूमाफिया के कब्जे का आरोप लगाते हुए एक व्यक्ति के शव को रेलवे स्टेशन ले जाने की कोशिश की। पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और सड़क पर प्रदर्शन किया। एक घंटे की समझाइश के बाद वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार हुआ। समाज ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
बाड़मेर (राजस्थान) में सोमवार को एक दर्दनाक और विवादास्पद घटना सामने आई, जब कालबेलिया (जोगी) समाज के लोगों ने एक व्यक्ति के शव को लेकर मुख्य सड़क पर प्रदर्शन किया। परिजनों और समाज के लोगों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए आवंटित जमीन पर भूमाफिया कब्जा कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। इस दौरान शव को रेलवे स्टेशन ले जाने की कोशिश में पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई, लेकिन करीब एक घंटे की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ और वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार करवाया गया।
घटना का विवरण जोगियों की दड़ी निवासी 53 वर्षीय वेदाराम (या देदाराम) चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। रविवार रात उनकी मृत्यु हो गई। सोमवार को परिजनों और कालबेलिया समाज के लोगों ने शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना चाहा। समाज का दावा है कि सरकार ने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए एक निश्चित जमीन आवंटित करने का वादा किया था, लेकिन वह जमीन अभी तक औपचारिक रूप से अलॉट नहीं हुई है। जब वे उस जमीन पर शव लेकर पहुंचे, तो वहां विवाद हो गया। प्रशासन ने सुझाव दिया कि फिलहाल वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार कर लें, लेकिन समाज के लोग इससे असहमत हो गए।नाराज परिजनों और समाज के लोगों ने शव को महाबार सर्किल से रेन बसेरा होते हुए रेलवे स्टेशन की ओर ले जाना शुरू कर दिया। उनका इरादा शव को ट्रेन में रखकर जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास तक ले जाने का था, ताकि अपनी मांग को जोरदार तरीके से रख सकें। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। महाबार सर्किल पर पहली बार रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद रेन बसेरा अंडरब्रिज के पास फिर रोकने का प्रयास किया गया, जहां एक बार फिर धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। अंततः पुलिस ने उन्हें रोक लिया और मुख्य सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। एसडीएम यशा शेखर, एएसपी नीतेश आर्य, कोतवाल मनोज कुमार, सदर थाना प्रभारी करतार सिंह, रीको थाना प्रभारी भंवरसिंह सहित चारों थानों की पुलिस और आरएसी के जवान मौजूद रहे। करीब एक घंटे की लंबी समझाइश के बाद कालबेलिया समाज के लोग मान गए और शव को वन विभाग की जमीन पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
समाज के आरोप: प्रशासन ने दिया 'लॉलीपॉप' कालबेलिया समाज के नारायण नाथ कालबेलिया ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "प्रशासन ने हमें लॉलीपॉप दे दिया। जो जमीन उन्होंने हमें दी है, उसके खसरा नंबर बताए हैं, लेकिन वहां भूमाफिया अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे। वे कहते हैं कि यह उनकी खातेदारी की जमीन है। इससे अच्छा तो हम शव को ट्रेन में डालकर मुख्यमंत्री आवास चले जाते। कलेक्टर हमारी नहीं सुन रहे। एएसपी, डीएसपी सहित पुलिस वाले हमें समझा रहे हैं, लेकिन आज अंतिम संस्कार के लिए हमें संघर्ष करना पड़ रहा है।"उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर प्रशासन नहीं माना तो समाज सांप और पूगी (परंपरागत वाद्य यंत्र) लेकर आएगा, तब सरकार सुनेगी। उन्होंने कहा, "सरकार के पास कंपनियों के लिए जमीनें हैं, लेकिन कालबेलिया समाज के लिए जमीन नहीं है।"यह घटना कालबेलिया समाज की लंबे समय से चली आ रही अंतिम संस्कार भूमि की समस्या को उजागर करती है। पहले भी राजस्थान में इस समुदाय को श्मशान भूमि के लिए संघर्ष करना पड़ा है।
प्रशासन का पक्ष तहसीलदार हुकमीचंद ने स्पष्ट किया कि जमीन आवंटन का प्रोसेस चल रहा है और जल्द ही अलॉट हो जाएगी। उन्होंने कहा, "जोगी समाज के व्यक्ति का निधन हो गया था। पटवारी को भेजा गया ताकि कोई विवाद न हो। वन विभाग का गेट खुलवाया गया। समाज के लोग आवंटित जमीन पर शव लेकर गए, लेकिन वहां प्रोसेस पूरा नहीं हुआ था। हमने उन्हें वन विभाग की जमीन पर आने को कहा, लेकिन वे रेलवे स्टेशन की ओर चले गए। समझाइश के बाद वे मान गए और वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार करवाया गया। तब तक कोई रोक नहीं होगी। यूआईटी प्रोसेस चल रहा है, जल्द अलॉटमेंट हो जाएगा।"