अरावली की ऊंची पहाड़ियों में बसे गांव में जीवन जुझारूपानी, बिजली और आधारभूत सुविधाओं की कमी.
अरावली की 2000 फीट ऊंचाई पर बसे राह का माला गांव में पीढ़ियों से ग्रामीण बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन बिता रहे हैं। यहां सोलर लाइट मात्र 2 घंटे मिलती है, पानी की आपूर्ति गंदे तालाब से होती है और वन्यजीवों का खतरा रहता है। बच्चों की पढ़ाई अधूरी रहती है और बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए पहाड़ से नीचे ले जाना पड़ता है। अधिकांश ग्रामीण मवेशियों पर निर्भर हैं और 79% के पास राशन कार्ड नहीं है।
अरावली की दुर्गम पहाड़ियों में करीब 2000 फीट की ऊंचाई पर बसा राह का माला गांव पीढ़ियों से कठिन जीवन जी रहा है। यह गांव कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर क्षेत्र में स्थित है और स्थानीय बोली में इसे रैकामाला कहा जाता है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
गांव में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यहां सोलर लाइट मात्र 2 घंटे के लिए मिलती है, जबकि बाकी समय ग्रामीण अंधेरे में रहते हैं। पानी की जरूरत भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी हुई है। मवेशियों के पानी पीने के तालाब से ही लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
पहाड़ी रास्तों की कठिनाई
गांव तक पहुंचना आसान नहीं है। संकरे और कच्चे रास्ते, बड़े-बड़े पत्थर और घने जंगलों के बीच से गुजरना पड़ता है। कई बार वाहन रास्ते में ही फंस जाते हैं। पैदल चलना भी कठिन है, और किसी भी छोटे काम के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर चलना पड़ता है।
वन्यजीवों का डर
गांव सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास स्थित है, जिससे जंगली जानवरों, विशेषकर तेंदुए का खतरा लगातार बना रहता है। रात के समय अंधेरे में बाहर निकलना जानलेवा हो सकता है। इसी कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और अधिकांश समय मवेशी चराने, जंगल में घूमने या खेल-कूद में ही व्यतीत करते हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा की कठिनाइयाँ
गांव में न तो कोई स्कूल है और न ही स्वास्थ्य केंद्र। बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए चारपाई पर लेटाकर पहाड़ से नीचे ले जाना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में ग्रामीण गंभीर जोखिम में रहते हैं।
आजीविका और राशन का अभाव
ग्रामीणों की आजीविका मुख्य रूप से मवेशियों पर निर्भर है। राशन और आवश्यक सामान लाने के लिए उन्हें पहाड़ से नीचे पैदल जाना पड़ता है और भारी सामान सिर पर उठाकर वापस लौटना पड़ता है। स्थानीय निवासी पायलट गुर्जर ने बताया कि 79% ग्रामीणों के पास राशन कार्ड तक नहीं हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
यह खबर हमें यह दिखाती है कि आधुनिक सुविधाओं से दूर, अरावली की पहाड़ियों में लोग आज भी प्राकृतिक कठिनाइयों और आधारभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद जीवन जी रहे हैं।