अंता उपचुनाव: निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने धरना दिया, गांव ने वोटिंग का बहिष्कार किया; 5 बजे तक 83% मतदान दर्ज

राजस्थान के बारा जिले की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव में 83% मतदान दर्ज, साकली गांव ने सड़क मांगों के लिए वोट बहिष्कार किया, निर्दलीय नरेश मीणा ने 15 मिनट धरना दिया

Nov 11, 2025 - 18:53
अंता उपचुनाव: निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने धरना दिया, गांव ने वोटिंग का बहिष्कार किया; 5 बजे तक 83% मतदान दर्ज

बारा (राजस्थान), 11 नवंबर 2025: राजस्थान के बारा जिले की अंता विधानसभा सीट पर आज उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कुल 268 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे समाप्त हो गई। 5 बजे तक 83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो इस क्षेत्र में उच्च मतदान प्रतिशत को दर्शाता है। हालांकि, इस उपचुनाव के दौरान एक छोटे स्तर का विवाद भी देखने को मिला, जब गांव साकली के मतदान केंद्र संख्या 219 पर ग्रामीणों ने सड़क निर्माण समेत अन्य मांगों को लेकर वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने ग्रामीणों के समर्थन में धरना दिया, लेकिन मात्र 15 मिनट बाद इसे समाप्त कर दिया।

उच्च मतदान, लेकिन सख्ती भरी व्यवस्था;  अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें प्रमुख दलों के उम्मीदवारों में भाजपा से मोरपाल सुमन और कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया शामिल हैं। अन्य उम्मीदवारों में निर्दलीय नरेश मीणा के अलावा कुछ अन्य निर्दलीय और छोटे दलों के प्रतिनिधि भी हैं। चुनाव आयोग की सख्ती के तहत वोटरों को पोलिंग बूथ के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसका पालन कराने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कुल 2 लाख से अधिक मतदाता इस चुनाव में भाग लेने के पात्र हैं, और उच्च मतदान प्रतिशत लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।मतदान प्रक्रिया सुबह से ही जोर-शोर से शुरू हो गई। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ देखी गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में युवा मतदाताओं का उत्साह प्रमुख रहा। चुनावी माहौल में पार्टियों के कार्यकर्ता मतदाताओं को प्रोत्साहित करने में लगे रहे, लेकिन आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया। शाम 5 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, 77.17 प्रतिशत मतदान हो चुका था, और अंतिम आंकड़े रात तक उपलब्ध होने की संभावना है।

साकली गांव में बहिष्कार का ड्रामा: सड़क और अन्य मांगें उपचुनाव की चकाचौंध के बीच साकली गांव के मतदान केंद्र 219 पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, बिजली-पानी की व्यवस्था और अन्य विकास संबंधी मांगों को पूरा न करने के विरोध में वोटिंग का बहिष्कार घोषित कर दिया। गांव वालों ने पोलिंग बूथ के बाहर बैनर लगाए, जिन पर लिखा था, "जब तक मांगें पूरी न हों, तब तक वोट न डालें।" इस बहिष्कार में करीब दो दर्जन ग्रामीण शामिल हुए, जिन्होंने पोलिंग बूथ का घेराव कर दिया।इस घटना के समर्थन में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा भी मौके पर पहुंचे। मीणा ने ग्रामीणों के साथ मिलकर धरना शुरू कर दिया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, "ग्रामीणों की पीड़ा को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। विकास के नाम पर धोखा दिया जा रहा है, इसलिए हम उनके साथ खड़े हैं।" हालांकि, प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान दिया जाएगा। मात्र 15 मिनट के धरने के बाद मीणा ने इसे समाप्त कर दिया, जिससे मतदान प्रक्रिया पर ज्यादा असर न पड़े। इस केंद्र पर अंततः सीमित मतदान हुआ, लेकिन बहिष्कार ने स्थानीय मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया।

इस उपचुनाव का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि अंता विधानसभा सीट पर हाल ही में विधायक के निधन के कारण सीट खाली हुई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इस सीट को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही थीं। भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन ने विकास कार्यों पर जोर दिया, जबकि कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने सामाजिक न्याय और किसान मुद्दों को प्रमुखता दी। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा जैसे चेहरे ने स्थानीय मुद्दों को उठाकर अप्रत्याशित उत्साह जगाया है। कुल 15 उम्मीदवारों में से अधिकांश निर्दलीय हैं, जो चुनाव को त्रिकोणीय संघर्ष बना सकते हैं।चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत भाजपा के पक्ष में जा सकता है, लेकिन कांग्रेस की सधी हुई रणनीति भी कम नहीं आंकी जा सकती। मतगणना 13 नवंबर को होगी, जिसके परिणाम राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेंगे।

प्रशासन की अलर्ट मोड में सुरक्षा व्यवस्था;  बारा जिले के प्रशासन ने उपचुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। 268 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी तैयार रखा गया। जिला कलेक्टर ने कहा, "मतदान प्रक्रिया बिना किसी बड़े हादसे के संपन्न हो गई। साकली जैसे छोटे विवादों को तुरंत सुलझा लिया गया।"

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.