राजस्थान विधायक निधि कमीशन मामले में सदाचार समिति के सामने पेश हुए तीनों विधायको की पूछताछ हुई शुरू।

राजस्थान विधानसभा की सदाचार समिति के सामने MLA फंड में कमीशन मांगने के आरोप में तीनों विधायक – भाजपा के रेवंतराम डांगा, कांग्रेस की अनीता जाटव और निर्दलीय ऋतु बनावत – आज (6 जनवरी 2026) पेश हुए। उन्होंने अपनी बेगुनाही के सबूत पेश किए। दिसंबर 2025 के स्टिंग ऑपरेशन में कमीशन की डील कैद होने के बाद मामला समिति को सौंपा गया था। जांच जारी है।

Jan 6, 2026 - 13:18
Jan 6, 2026 - 13:23
राजस्थान विधायक निधि कमीशन मामले में सदाचार समिति के सामने पेश हुए तीनों विधायको की पूछताछ हुई शुरू।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा की सदाचार समिति (एथिक्स कमेटी) ने विधायक निधि (MLA LAD फंड) से विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले कमीशन मांगने के गंभीर आरोपों की जांच आगे बढ़ाई है। आज (6 जनवरी 2026, मंगलवार) को आरोपी तीनों विधायक – खींवसर (नागौर) से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन (करौली) से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और बयाना (भरतपुर) से निर्दलीय विधायक डॉ. ऋतु बनावत – समिति के सामने पेश हुए।समिति ने उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत और दस्तावेज पेश करने को कहा था। तीनों विधायक विधानसभा पहुंचे, जहां सुबह करीब 11 बजे ऋतु बनावत, उसके बाद अनीता जाटव और फिर रेवंतराम डांगा पेश हुए। समिति की अध्यक्षता कैलाश वर्मा कर रहे हैं। पूछताछ के दौरान स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो और अन्य तथ्यों पर विस्तृत सवाल-जवाब हुए .

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद दिसंबर 2025 में दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन से शुरू हुआ, जिसमें विधायक निधि से कार्य अनुशंसा के बदले कमीशन की डील कैमरे में कैद हुई:

रेवंतराम डांगा (भाजपा): 50 लाख के कार्य के लिए 40% कमीशन मांगा और जिला परिषद CEO के नाम अनुशंसा पत्र जारी किया। 

अनीता जाटव (कांग्रेस): 50 हजार रुपये टोकन मनी लिए और 80 लाख के कार्य के लिए अनुशंसा पत्र दिया।

ऋतु बनावत (निर्दलीय): उनके पति ने रिपोर्टर से 40 लाख की डील फाइनल की.

इस खुलासे के बाद:

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीनों विधायकों के MLA फंड खाते फ्रीज कर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। 

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामला सदाचार समिति को सौंपा।

भाजपा और कांग्रेस ने अपने विधायकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा।

पहले की सुनवाई और आज की पेशी

19 दिसंबर 2025 को पहली सुनवाई में तीनों विधायक पेश हुए, लेकिन बेगुनाही के ठोस सबूत नहीं दे पाए। उन्होंने अतिरिक्त समय मांगा – डांगा ने 15 दिन, बनावत ने 10 दिन और जाटव ने 7 दिन। इसके बाद समिति ने 6 जनवरी को फिर तलब किया।आज की पेशी में विधायकों ने अपने सबूत पेश किए। ऋतु बनावत ने मीडिया से बातचीत में आरोपों को षड्यंत्र बताया और CBI या हाईकोर्ट जज से जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि वे पूरे दस्तावेज लेकर आई हैं और समिति के सामने सब साबित करेंगी। अन्य दो विधायकों ने मीडिया से बात नहीं की।

आगे की कार्रवाई

समिति अब पेश सबूतों की जांच करेगी, जिसमें स्टिंग वीडियो की FSL जांच भी शामिल हो सकती है। यदि संतुष्ट नहीं हुई तो फिर नोटिस जारी हो सकता है। बजट सत्र (जनवरी अंत) से पहले समिति अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है, जिसके आधार पर विधायकों की सदस्यता पर कार्रवाई हो सकती है। सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम है।यह मामला राजस्थान की राजनीति में बड़ा भूचाल ला चुका है, क्योंकि इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक शामिल हैं। जांच निष्पक्ष और तथ्यात्मक होने की उम्मीद है।