6 मई की दोपहर करीब 12:30 बजे युवराज के पिता प्रताप सिंह के पास सेना के अधिकारी का फोन आया। पहले सामान्य बातचीत हुई, फिर धीरे-धीरे माहौल गंभीर होता गया। अधिकारी ने पूछा कि युवराज से आखिरी बार कब बात हुई थी। पिता ने बताया कि रात को ही बातचीत हुई थी, जिसमें युवराज ने कहा था कि वह कुछ ही महीनों में घर लौटेगा और फिर RAS की तैयारी करेगा। इसके बाद अचानक वह शब्द आए, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी “उसे गोली लग गई है…”यह सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई।
युवराज बचपन से ही देशसेवा का सपना देखते थे। उनके दादा भी सेना में थे और 1999 में उन्हें गोली लगी थी, लेकिन वे बाद में घर लौट आए थे। उसी प्रेरणा से युवराज ने भी सेना में जाने का फैसला किया। परिवार के अनुसार, वह बेहद मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित थे। मात्र 17-18 साल की उम्र में ही उन्होंने पहली बार अग्निवीर भर्ती परीक्षा पास कर ली थी।
मां और दादी का दर्द आंसू नहीं रुक रहे
युवराज की मां संतोषी देवी बेटे की शहादत की खबर सुनकर बेसुध हो गईं। तब से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनका दर्द कम नहीं हो रहा। दादी सीतादेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रही हैं कि “तेरे दादा जैसे लौट आए थे, वैसे ही तू भी लौट आता…”
भाई के साथ आखिरी बातचीत
युवराज के बड़े भाई हरीश सिंह ने बताया कि मंगलवार रात उनकी युवराज से लंबी बात हुई थी। वह बेहद उत्साहित था और कह रहा था कि “अब सिर्फ 6-7 महीने बचे हैं, फिर घर आकर RAS की तैयारी करूंगा।” परिवार को पूरा विश्वास था कि अगर वह प्रतियोगी परीक्षा देता, तो निश्चित रूप से सफलता हासिल करता।
गांव में शोक, हर आंख नम
लगेतखेड़ा गांव में हर तरफ शोक का माहौल है। लोग लगातार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। हर कोई युवराज को एक होनहार, अनुशासित और देशभक्त जवान के रूप में याद कर रहा है, उनकी शहादत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और एक सवाल छोड़ दिया है—एक सपना जो पूरा होने से पहले ही देश के लिए कुर्बान हो गया। युवराज भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका साहस और बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।