“पगला गए हैं वो… गहलोत जी इलाज कराएं” आखिर ऐसा क्यों बोला मदन दिलावर ने डोटासरा को? जानिए पूरा मामला
एक तरफ करोड़ों के घोटाले के गंभीर आरोप, तो दूसरी तरफ “मानसिक संतुलन बिगड़ गया है” जैसी तीखी प्रतिक्रिया… राजस्थान की राजनीति में डोटासरा और मदन दिलावर के बीच छिड़ी यह जुबानी जंग
राजस्थान की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। इस बार आमने-सामने हैं राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा। मामला तब शुरू हुआ जब गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर उनके कार्यकाल के दौरान कथित घोटाले और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। डोटासरा ने दावा किया कि हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड संस्था में करोड़ों रुपये का गबन हुआ है, जिसमें अवैध वसूली, खातों में ट्रांसफर और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
डोटासरा के आरोपों से मचा सियासी बवाल
डोटासरा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्री स्वयं संस्था के अध्यक्ष थे, तो करोड़ों के कथित गबन कैसे हुए और किसके आदेश पर हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कैंपों में अनियमितताएं और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए पैसे वसूले गए, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिलावर का पलटवार – “मानसिक संतुलन खो बैठे हैं”
इन आरोपों के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने डोटासरा पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके आरोप निराधार हैं और वे “मानसिक संतुलन खो बैठे हैं”। दिलावर ने यहां तक कहा कि कांग्रेस नेता को इलाज की जरूरत है और यह बयानबाजी पूरी तरह गलत है।
उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि स्काउट एंड गाइड संस्था के सेवा नियम ही तैयार नहीं थे, इसलिए न तो भर्ती संभव थी और न ही भुगतान। इसी कारण वित्तीय आवंटन को निरस्त करना पड़ा।
सियासी बयानबाजी से बढ़ा टकराव
दिलावर ने अपने बयान में डोटासरा को अपना मित्र बताते हुए भी कड़ा तंज कसा और कहा कि “भगवान करे उनका दिमागी संतुलन और न बिगड़े।” इस टिप्पणी ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
लगातार बढ़ती राजनीतिक तनातनी
यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच इस तरह की तीखी बयानबाजी हुई हो। इससे पहले भी कई बार डोटासरा और दिलावर आमने-सामने आ चुके हैं। लेकिन इस बार मामला आरोपों से आगे बढ़कर व्यक्तिगत टिप्पणी तक पहुंच गया है, जिससे राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।