सोना-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर: क्यों हो रही है इतनी तेजी, कब रुकेगी और आगे क्या?

भारतीय बाजार में सोना और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। 24 कैरेट सोना 1.33 से 1.35 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 1.90 से 2.04 लाख रुपये प्रति किलो तक है। वैश्विक अस्थिरता, कमजोर रुपया, त्योहारों की डिमांड और चांदी की इंडस्ट्रियल जरूरतें मुख्य वजहें हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में भी तेजी जारी रह सकती है, सोना 1.5 लाख से ऊपर और चांदी 2.4 लाख तक जा सकती है। निवेश के लिए अच्छा, लेकिन गहनों के लिए इंतजार बेहतर।

Dec 13, 2025 - 12:42
सोना-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर: क्यों हो रही है इतनी तेजी, कब रुकेगी और आगे क्या?

आज 13 दिसंबर 2025 को भारतीय बाजार में सोना और चांदी दोनों ही कीमती धातुएं आसमान छू रही हैं। 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1 लाख 33,000 से 1 लाख 35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रही है, जो रिकॉर्ड हाई के बहुत करीब है। वहीं चांदी ने तो सभी को चौंका दिया है – 1 किलो चांदी की कीमत 1 लाख 90 हजार से 2 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई है। कुछ जगहों पर यह 2 लाख के पार भी जा चुकी है। एक साल पहले सोना 80-85 हजार के आसपास था और चांदी 90-95 हजार प्रति किलो, यानी दोनों ने 60-100% से ज्यादा की छलांग लगाई है। चांदी तो सोने से भी आगे निकल गई!

 इतनी महंगाई क्यों आई? मुख्य कारण आसान भाषा में:वैश्विक अस्थिरता और सेफ हेवन डिमांड: दुनिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन (युद्ध, राजनीतिक अनिश्चितता), मंदी की आशंका और इन्फ्लेशन के कारण निवेशक शेयर मार्केट से पैसा निकालकर सोने-चांदी में लगा रहे हैं। सोना-चांदी को "सेफ हेवन" माना जाता है – मुश्किल समय में ये चमकते हैं। 2025 में US Fed के रेट कट, कमजोर डॉलर और ग्लोबल अनिश्चितता ने कीमतों को बूस्ट दिया। रुपया कमजोर, इंपोर्ट महंगा: भारत अपना 90% से ज्यादा सोना और चांदी इंपोर्ट करता है। रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना (2025 में काफी गिरावट) ने आयात महंगा कर दिया। डॉलर मजबूत = सोना-चांदी महंगा।

देसी डिमांड का जोर: दिसंबर-जनवरी शादी-त्योहार का सीजन है। ज्वेलरी की डिमांड हाई है। चांदी में इंडस्ट्रियल यूज (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV) भी तेजी से बढ़ रहा है, जो गोल्ड से अलग इसे एक्स्ट्रा बूस्ट दे रहा है। अन्य फैक्टर: सेंट्रल बैंक खरीदारी (चाइना, इंडिया आदि), ETF इनफ्लो और सप्लाई क्रंच (चांदी में खासतौर पर)। चांदी 2025 में 85-100% से ज्यादा चढ़ी क्योंकि इंडस्ट्रियल डिमांड रिकॉर्ड हाई पर है। 

ये तेजी कब रुकेगी? आगे क्या – और महंगा या राहत?ये बुल रन हमेशा नहीं चलेगा। बीच-बीच में करेक्शन (गिरावट) आता रहता है। अगर:स्टॉक मार्केट बूम करे,डॉलर और मजबूत हो,ग्लोबल टेंशन कम हो, US इकोनॉमी तेज चले, तो थोड़ी पुलबैक (गिरावट) आ सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी ट्रेंड बुलिश रहेगा:सोना: 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है (कुछ फोरकास्ट में और ऊपर)। WGC कहता है 15-30% और बढ़ोतरी संभव अगर रेट कट जारी रहे। चांदी: 2.4 लाख प्रति किलो तक का टारगेट (Axis Securities आदि)। इंडस्ट्रियल डिमांड (ग्रीन एनर्जी) से चांदी गोल्ड को आउटपरफॉर्म कर सकती है। अगर अमेरिकी इकोनॉमी स्ट्रॉन्ग हुई तो पुलबैक possible, लेकिन लॉन्ग टर्म में दोनों लंबी रेस के घोड़े हैं।सलाह: क्या करें?गहने के लिए खरीद रहे हैं? अभी दाम हाई हैं, थोड़ा इंतजार करें। करेक्शन का फायदा उठाएं।

निवेश के लिए? लंबे समय के लिए अच्छा। SIP की तरह थोड़ा-थोड़ा खरीदें। चांदी में ज्यादा पोटेंशियल लग रहा है।याद रखें: कीमतें रोज बदलती हैं, लेटेस्ट रेट चेक करें (MCX, Goodreturns आदि साइट्स पर)। 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.