पश्चिम एशिया में छिड़ी 'जंग' के बीच PM मोदी की सीक्रेट डिप्लोमेसी: मैक्रों से लेकर कुवैत तक, शांति के लिए भारत ने संभाली कमान

पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, मलेशिया के पीएम और ओमान के सुल्तान से फोन पर चर्चा की। पीएम ने तनाव कम करने के लिए कूटनीति और संवाद पर जोर दिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। पढ़ें भारत की शांति पहल की पूरी रिपोर्ट।

Mar 19, 2026 - 17:55
पश्चिम एशिया में छिड़ी 'जंग' के बीच PM मोदी की सीक्रेट डिप्लोमेसी: मैक्रों से लेकर कुवैत तक, शांति के लिए भारत ने संभाली कमान

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस भीषण संघर्ष और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित खतरों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है। पीएम मोदी लगातार वैश्विक नेताओं से फोन पर बातचीत कर शांति और संवाद की बहाली की अपील कर रहे हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों से तनाव कम करने पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'एक्स' (Twitter) हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से विस्तार से बात की है। पीएम ने लिखा, "मैंने अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति मैक्रों से पश्चिम एशिया की स्थिति और तनाव कम करने की तत्काल आवश्यकता पर चर्चा की। हम संवाद और कूटनीति की ओर लौटने के पक्ष में हैं और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए घनिष्ठ समन्वय जारी रखेंगे।"

मलेशिया और कुवैत के नेताओं से भी साधा संपर्क

फ्रांस के अलावा पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और कुवैत के क्राउन प्रिंस से भी बात की है।

  • मलेशिया: पीएम ने आगामी ईद-उल-फितर की शुभकामनाएं देते हुए पश्चिम एशिया की चिंताजनक स्थिति पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

  • कुवैत: बुधवार को हुई इस बातचीत में पीएम मोदी ने भारत की सबसे बड़ी चिंता 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वहां से जहाजों का सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत की 'सीक्रेट डिप्लोमेसी' और वैश्विक बाजार

ईरान पर यूएस-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब भीषण रूप ले चुका है। जानकारों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा, तो वैश्विक तेल बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। इन्ही दुष्प्रभावों को कम करने के लिए भारत अपनी 'सीक्रेट डिप्लोमेसी' के जरिए संतुलन बनाने की सफल कोशिश कर रहा है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground