पश्चिम बंगाल के स्कूल में ‘तौलिया डांस’ विवाद: DDLJ गाने पर तौलिए लपेटकर नाचीं लड़कियां, बच्चों के सामने परफॉर्मेंस का वीडियो वायरल, अभिभावक-नेटिजन्स में घोर आक्रोश
पश्चिम बंगाल के कदमताल स्थित जीबन ज्योति मॉडल स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में लड़कियों ने DDLJ गाने पर तौलिए लपेटकर डांस किया। वीडियो वायरल होकर सोशल मीडिया पर तूफान लाया, नेटिजन्स ने इसे अश्लील और बच्चों के लिए अनुपयुक्त बताया। स्कूल की चुप्पी, अभिभावकों में गुस्सा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सीमाओं पर बहस छिड़ी।
कोलकाता (पश्चिम बंगाल), 16 मार्च 2026: सोशल मीडिया पर एक स्कूल सांस्कृतिक कार्यक्रम का छोटा-सा 15 सेकेंड का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे देश में तूफान मचा दिया है। वीडियो पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कदमताल इलाके स्थित जीबन ज्योति मॉडल स्कूल (Jeeban Jyoti Model School) के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ा है। इसमें कुछ लड़कियां स्टेज पर सफेद तौलिए लपेटकर बॉलीवुड गाने “मेरे ख्वाबों में आजा” (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे फिल्म की काजोल वाली आइकॉनिक सीन) पर एनर्जेटिक डांस कर रही हैं। बैकग्राउंड में स्कूल का नाम साफ दिख रहा है और सामने दर्शकों में दर्जनों स्कूली बच्चे बैठे हुए हैं।
वीडियो दो दिन पहले (लगभग 14 मार्च 2026) सोशल मीडिया पर सामने आया और अब लाखों व्यूज पार कर चुका है। नेटिजन्स ने इसे “तौलिया डांस” नाम दे दिया और इसे स्कूल के माहौल के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त, अश्लील और घिनौना बताया। कई यूजर्स ने लिखा, “स्कूल है या मुजरा घर? बच्चों के सामने यह क्या हो रहा है?” कुछ ने इसे “विद्या का मंदिर नहीं, संस्कृति का अपमान” करार दिया। एक यूजर ने टिप्पणी की, “काजोल की फिल्म वाली सीन स्कूल स्टेज पर? आयोजक और प्रिंसिपल को जवाबदेह बनाना चाहिए।” दूसरे ने मांग की, “स्कूल की मान्यता रद्द करो, आयोजकों की गिरफ्तारी हो।”
यह प्रदर्शन कथित तौर पर स्कूल के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा था। लड़कियां तौलिए को कपड़े की तरह लपेटकर डांस कर रही थीं। गाने की धुन के साथ उनके मूवमेंट्स फिल्म की मूल सीन से प्रेरित थे, लेकिन स्कूल जैसे पवित्र माहौल में इसे देखकर अभिभावक और शिक्षाविद् हैरान हैं। वीडियो में बच्चे शांत बैठे तमाशा देखते नजर आ रहे हैं, जिसने विवाद को और भड़का दिया। कई लोगों ने पूछा कि स्कूल प्रशासन ने यह परफॉर्मेंस कैसे पास होने दिया? क्या कोई सुपरविजन नहीं था?
जीबन ज्योति मॉडल स्कूल एक इंग्लिश मीडियम स्कूल है और कई जगहों पर इसे सीबीएसई से संबद्ध बताया जा रहा है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई। स्कूल प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण नहीं आया है। न तो प्रिंसिपल ने कुछ कहा, न ही पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने कोई जांच शुरू करने की बात कही। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स लगातार स्कूल से जवाब मांग रहे हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि यह परफॉर्मेंस स्कूल द्वारा आयोजित नहीं बल्कि किसी लोकल क्लब या स्पॉन्सर द्वारा रखा गया था, लेकिन स्कूल बैनर लगने से विवाद बढ़ गया।
यह घटना स्कूल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सीमाओं पर बड़े सवाल खड़ा कर रही है। भारत में स्कूल फंक्शन्स में पारंपरिक नृत्य, गायन, नाटक होते रहते हैं, लेकिन हाल के सालों में कुछ स्कूलों में “मॉडर्न” या फिल्मी आइटम्स की परफॉर्मेंस को लेकर विवाद उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के सामने ऐसी परफॉर्मेंस से गलत संदेश जाता है। शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी ने कहा, “स्कूल सिर्फ पढ़ाई का नहीं, संस्कार का भी स्थान है। आयोजकों को उम्र के हिसाब से कंटेंट चुनना चाहिए।” वहीं कुछ यूजर्स ने बचाव किया, “फिल्में तो घर में सब देखते हैं, इसे इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? क्रिएटिव एक्सप्रेशन है।”
पेरेंट्स एसोसिएशन और महिला संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कई अभिभावकों ने कहा, “हम अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं पढ़ने और संस्कार सीखने, न कि ऐसे डांस देखने।” कुछ ने तो स्कूल को बंद करने की मांग तक कर दी। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कह रहे हैं कि वीडियो को संदर्भ से बाहर निकालकर वायरल किया गया है और पूरी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे देश के स्कूलों में सांस्कृतिक गतिविधियों के नियमन का मुद्दा बन गया है। सीबीएसई और राज्य शिक्षा बोर्डों को अब सख्त गाइडलाइंस जारी करने की जरूरत है कि स्कूल फंक्शन्स में क्या परफॉर्मेंस स्वीकार्य है और क्या नहीं। विशेषकर जब दर्शकों में नाबालिग बच्चे हों। सोशल मीडिया की वजह से छोटे-से क्लिप पूरे देश में पहुंच जाते हैं, इसलिए स्कूल प्रशासन को पहले से ही सतर्क रहना चाहिए।
फिलहाल जीबन ज्योति मॉडल स्कूल पर दबाव बढ़ रहा है। अगर शिक्षा विभाग या पुलिस कोई जांच शुरू करती है तो आगे और खुलासे हो सकते हैं। इस बीच वीडियो वायरल होना जारी है और बहस तेज। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि शिक्षा संस्थानों में रचनात्मकता और नैतिकता के बीच संतुलन कितना जरूरी है। अभिभावक अब सवाल कर रहे हैं – क्या हमारे स्कूल बच्चों को सही दिशा दे रहे हैं या बस मनोरंजन का साधन बन गए हैं?