पश्चिम एशिया संकट: मोदी सरकार की कूटनीति के मुरीद हुए कांग्रेस के दिग्गज, शशि थरूर के बाद मनीष तिवारी ने भी किया समर्थन

पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार की नीति को कांग्रेस दिग्गजों का साथ। राहुल गांधी के विरोध के बीच शशि थरूर और मनीष तिवारी ने सरकार की 'रणनीतिक चुप्पी' को सराहा और इसे 'जिम्मेदार कूटनीति' करार दिया। पूरी रिपोर्ट यहाँ।"

Mar 19, 2026 - 16:46
पश्चिम एशिया संकट: मोदी सरकार की कूटनीति के मुरीद हुए कांग्रेस के दिग्गज, शशि थरूर के बाद मनीष तिवारी ने भी किया समर्थन

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत सरकार की 'रणनीतिक चुप्पी' को लेकर देश के भीतर सियासत गरमा गई है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के स्टैंड पर सवाल उठा रहा है, वहीं पार्टी के ही दो दिग्गज सांसदों ने सरकार की विदेश नीति का खुलकर समर्थन किया है। शशि थरूर के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी सरकार के रुख को 'सही' करार दिया है।

"यह हमारी लड़ाई नहीं है" - मनीष तिवारी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत सरकार की कूटनीति का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में कई युद्ध एक साथ चल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस टकराव में किसी एक का पक्ष न लेना ही भारत के हित में है।

तिवारी ने कहा, "यह समझना जरूरी है कि यह हमारी लड़ाई नहीं है। अगर हम सावधानी बरत रहे हैं, तो मुझे लगता है कि हम सही कर रहे हैं। रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का असली अर्थ यही है कि हम अपने हितों की रक्षा करें और आगे बढ़ें।"

शशि थरूर ने बताया 'जिम्मेदार कूटनीति'

इससे पहले पूर्व राजनयिक और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी एक लेख के जरिए मोदी सरकार का बचाव किया था। थरूर ने भारत के स्टैंड को स्पष्ट करते हुए कहा था कि खाड़ी संकट पर भारत की चुप्पी को 'नैतिक सरेंडर' नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह एक 'बेहद जिम्मेदार कूटनीति' का हिस्सा है।

पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से अलग राह

इन दोनों बड़े नेताओं का बयान कांग्रेस के आधिकारिक स्टैंड से बिल्कुल विपरीत है, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद साफ नजर आ रहे हैं:

  • राहुल गांधी और खरगे का रुख: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरान पर हुए हमलों और अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत सरकार की चुप्पी की कड़ी आलोचना की है।

  • विपक्ष की मांग: राहुल गांधी का तर्क है कि भारत को ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध करना चाहिए था। जयराम रमेश और पवन खेड़ा जैसे नेताओं ने इस चुप्पी को विदेश नीति के लिए खतरा बताया है।

कूटनीति की बिसात पर भारत का कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे अनुभवी नेताओं का समर्थन दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक संबंधों के मामले में सरकार की 'वेट एंड वॉच' (रुको और देखो) की नीति कूटनीतिक रूप से प्रभावी है। भारत के लिए ईरान के साथ ऊर्जा संबंध और इजरायल के साथ रक्षा संबंध, दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground