बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में 'गैर-सनातनियों' के प्रवेश पर लगी रोक, बजट बैठक में हुआ ऐतिहासिक निर्णय
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बजट बैठक में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 121 करोड़ से अधिक का बजट मंजूर किया गया है।
देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड की पावन देवभूमि से एक ऐसी खबर आई है जो आने वाले समय में तीर्थाटन और मंदिर प्रबंधन की दिशा बदल सकती है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए अब इन दोनों पवित्र धामों में 'गैर-सनातनियों' (Non-Sanatanis) के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह निर्णय मंदिर की शुचिता, परंपराओं के संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
कैसे और कब लिया गया यह फैसला?
यह बड़ा निर्णय बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बजट बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने इस बात पर गहन चर्चा की कि धामों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में केवल सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। यह नियम न केवल इन दो मुख्य धामों पर, बल्कि समिति के अंतर्गत आने वाले सभी 46 मंदिरों पर लागू होगा।
121 करोड़ का बजट हुआ मंजूर
इस बैठक में केवल प्रवेश के नियमों पर ही बात नहीं हुई, बल्कि मंदिरों के विकास और सुविधाओं के लिए भारी-भरकम बजट भी पास किया गया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मंदिर समिति ने 121 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का अनुमानित बजट मंजूर किया है। इस बजट का मुख्य हिस्सा श्रद्धालुओं की सुविधाओं, मंदिरों के जीर्णोद्धार, सुरक्षा इंतजामों और कर्मचारियों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार बजट में वृद्धि की गई है ताकि चार धाम यात्रा को और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।
फैसले के पीछे का तर्क और प्रभाव
हाल के वर्षों में चार धाम यात्रा के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आई थीं, जिनसे मंदिर की मर्यादा को ठेस पहुँचने की खबरें मिली थीं। कई हिंदू संगठनों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों द्वारा लगातार मांग की जा रही थी कि मंदिर परिसर के भीतर केवल उन्हीं लोगों को जाने दिया जाए जिनकी आस्था सनातन धर्म में है। मंदिर समिति का मानना है कि इस कदम से न केवल भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) में मदद मिलेगी, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का उल्लंघन भी नहीं होगा।
आगामी यात्रा सीजन के लिए चुनौतियां
इस फैसले के लागू होने के बाद अब आगामी यात्रा सीजन में सुरक्षा और जांच की बड़ी चुनौती होगी। मंदिर समिति और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रवेश द्वार पर ही श्रद्धालुओं की पहचान और आस्था का सत्यापन किया जा सके। हालाँकि, यह फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है; जहाँ एक तरफ भक्त इसे धर्म की रक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे पर्यटन के नजरिए से चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।