कमर की चोट ने क्रिकेटर बनने का सपना तोड़ा, लेकिन योग ने दिया नया जीवन: 20 हजार किमी पैदल यात्रा कर योग जागरूकता फैला रहे कृष्णा नायक, नक्सलियों ने किडनैप किया तो सच्चाई जानकर खाना खिलाया और पैसे दिए

कर्नाटक के मैसूर निवासी 32 वर्षीय कृष्णा नायक की कमर की गंभीर चोट ने क्रिकेटर बनने का सपना तोड़ दिया, लेकिन योग से ठीक होने के बाद उन्होंने योग के महत्व को फैलाने के लिए 16 अक्टूबर 2022 से पैदल यात्रा शुरू की। अब तक 1251+ दिनों में ~20,000 किमी तय कर 25 राज्यों, नेपाल और भूटान घूम चुके हैं। छत्तीसगढ़ के नक्सली क्षेत्र में किडनैप होने पर सच्चाई जानकर नक्सलियों ने खाना खिलाया और पैसे दिए। पूर्व क्रिकेटर जवागल श्रीनाथ उनके मुख्य समर्थक हैं। यात्रा का उद्देश्य स्कूल-कॉलेजों में योग जागरूकता फैलाना है, जो जल्द चेन्नई में समाप्त होगी।

Mar 23, 2026 - 12:59
कमर की चोट ने क्रिकेटर बनने का सपना तोड़ा, लेकिन योग ने दिया नया जीवन: 20 हजार किमी पैदल यात्रा कर योग जागरूकता फैला रहे कृष्णा नायक, नक्सलियों ने किडनैप किया तो सच्चाई जानकर खाना खिलाया और पैसे दिए

जयपुर में पहुंचे मैसूर के 32 वर्षीय कृष्णा नायक की प्रेरणादायक कहानी एक साधारण युवा से असाधारण संकल्प की मिसाल है। कमर में गंभीर चोट लगने से उनका क्रिकेटर बनने का सपना चूर-चूर हो गया था, लेकिन योग के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी सेहत वापस पाई, बल्कि पूरे देश को योग के महत्व से अवगत कराने का बीड़ा उठाया। इस मकसद से उन्होंने 16 अक्टूबर 2022 को कर्नाटक के मैसूर से पैदल यात्रा शुरू की, जो अब तक 1251 दिनों से अधिक चल रही है। इस दौरान उन्होंने लगभग 20 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर ली है, जिसमें भारत के 25 राज्य, नेपाल और भूटान शामिल हैं।

क्रिकेट से योग तक का सफर

कृष्णा नायक मूल रूप से एक क्रिकेट प्रेमी थे। वे पेशेवर क्रिकेटर बनने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक कमर (बैक) में गंभीर इंजरी हो गई। इस चोट के कारण वे ठीक से खड़े होने, उठने-बैठने या सोने तक में असमर्थ हो गए। क्रिकेट खेलना तो दूर, रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो गई। डॉक्टरों के इलाज से फायदा नहीं हुआ, तब उन्होंने योग की शरण ली। नियमित योग अभ्यास से न केवल उनकी इंजरी ठीक हुई, बल्कि वे पहले से ज्यादा स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करने लगे।

इस अनुभव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। लोगों ने उन्हें बताया कि योग ने उन्हें "नया जीवन" दिया है। इसी प्रेरणा से उन्होंने फैसला किया कि वे योग के फायदों को हर बच्चे, युवा और आम जनता तक पहुंचाएंगे। उन्होंने विभिन्न प्रकार के योग आसनों को सीखा और युवाओं को ट्रेनिंग देने का संकल्प लिया।

यात्रा की शुरुआत और चुनौतियां

16 अक्टूबर 2022 को मैसूर से शुरू हुई यह "योग यात्रा" (Walk for Yoga) अब एक ऐतिहासिक अभियान बन चुकी है। कृष्णा 100% पैदल चल रहे हैं, बिना किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के। उनके पास जीपीएस ट्रैकर है, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। यात्रा के दौरान उन्होंने केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को पार किया।

सबसे रोमांचक और डरावना अनुभव छत्तीसगढ़ में हुआ, जहां वे इंद्रावती नेशनल पार्क के रेड अलर्ट क्षेत्र (नक्सली प्रभावित जंगल) से गुजर रहे थे। अचानक नक्सलियों ने उन्हें किडनैप कर लिया। जंगल में ले जाकर पूछताछ शुरू हुई। कृष्णा को हिंदी ठीक से नहीं आती थी और नक्सलियों को इंग्लिश समझ नहीं आ रही थी। वे काफी डर गए, रोने लगे। नक्सलियों ने धमकाया कि सच्चाई बताओ, वरना मार देंगे।

लगभग 4 घंटे बाद नक्सलियों ने गूगल पर उनकी यात्रा के बारे में जानकारी खोजी। जब उन्हें पता चला कि यह व्यक्ति योग जागरूकता के लिए पैदल घूम रहा है, तो उनकी सोच उन्हें पसंद आई। उन्होंने न केवल कृष्णा को छोड़ दिया, बल्कि प्यार से खाना खिलाया और कुछ पैसे भी दिए ताकि उनका सफर सुचारू रूप से जारी रहे।

इसी तरह मणिपुर में भी चुनौतियां आईं। तिरंगा लेकर चल रहे कृष्णा को कुछ लोगों ने हिरासत में लिया और कहा कि "यह भारत का हिस्सा नहीं है"। वे काफी परेशान हुए, लेकिन भगवान की कृपा से यात्रा जारी रही।

समर्थन और उपलब्धियां

इस लंबी यात्रा में उनका सबसे बड़ा सहारा पूर्व भारतीय क्रिकेटर जवागल श्रीनाथ हैं। श्रीनाथ ने ही उनकी यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी। वे उनके खाने-पीने का पूरा खर्च उठा रहे हैं और सबसे बड़े मददगार बने हुए हैं। परिवार, दोस्त और कर्नाटक सरकार भी सपोर्ट कर रही है। सरकार ने पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट दिया है, जिससे स्कूल, कॉलेज, मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारे में उन्हें ठहरने की सुविधा मिलती है। वे जंगल और पुलिस स्टेशन में भी रात बिता चुके हैं।

अब तक कृष्णा 800 से ज्यादा IIT, NIT, स्कूल-कॉलेज में जाकर हजारों बच्चों को योग सिखा चुके हैं। उनका उद्देश्य है कि भारत का हर बच्चा और युवा योग के महत्व को समझे और स्वस्थ रहे।

यात्रा का भविष्य

फिलहाल वे राजस्थान (जयपुर) में हैं। राजस्थान के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र होते हुए चेन्नई पहुंचेंगे। अनुमान है कि अगले 6 महीनों में यात्रा पूरी हो जाएगी, जहां चेन्नई में इसका समापन होगा।

परिवार से मुलाकात कम हुई है, लेकिन वे कहते हैं, "पूरा देश मेरा परिवार है।" बीच में परिवार वाले मिलने आए थे। वे सबको मिस करते हैं, लेकिन योग और स्वास्थ्य के प्रचार के लिए लगातार चलते रहना उनकी प्राथमिकता है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.