पिता का बदला लेने आनंदपाल गैंग में शामिल हुआ सुभाष बानूड़ा गिरफ्तार: कोर्ट में सरेंडर के बाद 2018 के आर्म्स एक्ट मामले में पकड़ा गया, ठेहट मर्डर और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में नाम आ चुका है

आनंदपाल गैंग के सरगना बलबीर बानूड़ा का बेटा सुभाष बानूड़ा पिता की मौत का बदला लेने के लिए गैंग में शामिल हुआ था। नवंबर 2025 में मनोज ओला फायरिंग केस में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद सीकर पुलिस ने उसे 2018 के आर्म्स एक्ट मामले में गिरफ्तार कर लिया। ठेहट मर्डर और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी उसका नाम आया था, लेकिन सबूत नहीं मिले।

Dec 12, 2025 - 16:21
पिता का बदला लेने आनंदपाल गैंग में शामिल हुआ सुभाष बानूड़ा गिरफ्तार: कोर्ट में सरेंडर के बाद 2018 के आर्म्स एक्ट मामले में पकड़ा गया, ठेहट मर्डर और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में नाम आ चुका है

सीकर/जयपुर। राजस्थान के कुख्यात आनंदपाल गैंग के सरगना और गैंगस्टर बलबीर बानूड़ा के बेटे सुभाष बानूड़ा को सीकर की सदर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुभाष ने पिछले महीने राजू ठेहट गैंग के मनोज ओला पर हुई फायरिंग के मामले में सीकर की एससी-एसटी कोर्ट में सरेंडर किया था। सरेंडर के तुरंत बाद ही पुलिस ने उसे 2018 के आर्म्स एक्ट से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी सुभाष के लंबे फरार जीवन का अंत मानी जा रही है, जिसमें वह पिता की मौत का बदला लेने के चक्कर में गैंगवार में गहराई तक डूब गया था।सीकर के एसपी प्रवीण नायक ने बताया कि सुभाष बानूड़ा को सदर थाने में आर्म्स एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला 18 मार्च 2018 का है, जिसमें हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ था। सुभाष का नाम इस मामले में फरार आरोपी के रूप में दर्ज था। सरेंडर के बाद पुलिस ने उसे सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत मुजरिम घोषित कर गिरफ्तार किया। अब सुभाष को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

2018 का आर्म्स एक्ट मामला: हथियारों का जखीरा और सुभाष का कनेक्शन यह पूरा वाकया 18 मार्च 2018 की आधी रात (लगभग 2 बजे) का है। सीकर सदर थाना पुलिस नाकाबंदी कर रही थी, जब बाइक पर सवार दो संदिग्ध नरेश कुमार और चंद्रभान को रोका गया। तलाशी लेने पर दोनों की जेब से एक-एक पिस्टल बरामद हुई। उनके पास मौजूद बैग से तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ—पांच और पिस्टलें, साथ ही कई मैगजीनें। दोनों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।पूछताछ के दौरान नरेश और चंद्रभान ने खुलासा किया कि ये हथियार आनंदपाल गैंग के प्रमुख सदस्य सुभाष बराल के जरिए सुभाष बानूड़ा को डिलीवर करने के लिए लाए गए थे। इस आधार पर पुलिस ने सुभाष बराल को भी आरोपी बनाया और बाद में मनोज कुमार बुरड़क को गिरफ्तार किया। कोर्ट में चालान पेश करते हुए नरेश, चंद्रभान और सुभाष बराल के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, कोर्ट ने 4 नवंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए नरेश और मनोज को बरी कर दिया। चंद्रभान की 2023 में ही मौत हो चुकी थी। सुभाष बानूड़ा ही इस मामले में लंबे समय से फरार था। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने उसे मुजरिम घोषित कर रखा था। अब सरेंडर के बाद यह पुराना केस उसके सिर पर आ गया है।

राजू ठेहट गैंग पर हमला: फायरिंग और फरार घोषित हथियारों के जखीरे की बरामदी के महज पांच महीने बाद ही सुभाष बानूड़ा ने अपनी आक्रामकता दिखाई। 9 अगस्त 2018 को उसने अपने साथियों—रामनिवास, संदीप सैनी, नटवरलाल, चचेरे भाई पवन और सीताराम सेवदा—के साथ मिलकर राजू ठेहट गैंग के प्रमुख सदस्य मनोज ओला पर फायरिंग कर दी। मनोज उस वक्त अपनी दुकान पर बैठा था। गोलीबारी इतनी तेज थी कि मनोज को छह गोलियां लग गईं। वह किसी तरह बच गया, लेकिन यह घटना राजस्थान के गैंगवार का एक बड़ा अध्याय बन गई।पुलिस ने सभी आरोपियों को जल्दी ही गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश कर दिया। जमानत मिलने के बाद सुभाष बानूड़ा ने कोर्ट की तारीखों पर हाजिर होना बंद कर दिया। नतीजा, 20 अगस्त 2025 को उसे फरार घोषित कर दिया गया। इसी तरह, सीताराम सेवदा को 31 अक्टूबर 2025 को फरार करार दिया गया। सुभाष का फरार रहना गैंगवार की आग को और भड़काने का कारण बना।

नवंबर में सरेंडर: ठेहट मर्डर और सिद्धू मूसेवाला कांड में नाम नवंबर 2025 के 18 से 20 तारीख के बीच सुभाष बानूड़ा ने मनोज ओला फायरिंग मामले में सीकर की एससी-एसटी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के पीछे दबाव यह था कि कोर्ट ने उसे फरार घोषित कर लिया था। उसके वकील रघुनाथराम सुला ने बताया, "जमानत मिलने के बाद सुभाष तारीखों पर नहीं पहुंचा, इसलिए फरार हो गया। सरेंडर के बाद अब 16 दिसंबर को अगली तारीख है।" सुभाष का नाम दो बड़े कांडों में भी सामने आ चुका है—राजू ठेहट की हत्या (ठेहट मर्डर) और पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या। ठेहट मर्डर में उसके खिलाफ इनाम भी घोषित हुआ था, लेकिन जांच में कोई ठोस सबूत न मिलने पर इनाम निरस्त कर दिया गया। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी उससे पूछताछ हुई, मगर कोई प्रमाण न मिला। जमानत के बाद सुभाष ज्यादातर अपने पैतृक गांव बानूड़ा और जयपुर में रहता था, लेकिन पुलिस की नजर में हमेशा फरार ही रहा।

पिता की मौत का बदला: आनंदपाल गैंग में प्रवेश सुभाष बानूड़ा का गैंग लाइफ में कदम रखना उसके पिता बलबीर बानूड़ा की मौत से जुड़ा है। बलबीर आनंदपाल गैंग के सरगना थे और राजस्थान के अंडरवर्ल्ड में उनका दबदबा था। 13 मार्च 2015 को सुभाष अपने पिता के साथियों के साथ एक फार्महाउस पर मौजूद था। रात में पुलिस ने छापा मारा, तो सुभाष मौके से फरार हो गया। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया और मौके से कई हथियार बरामद किए। इस घटना के बाद सुभाष को आर्म्स एक्ट के तहत मुजरिम घोषित कर दिया गया। पिता की मौत का बदला लेने की आग में सुभाष ने आनंदपाल गैंग को पूरी तरह जॉइन कर लिया।आनंदपाल सिंह की 24 जून 2017 को मौत के बाद सुभाष ने अपने पिता के पुराने दोस्त सुभाष बराल के लिए काम शुरू किया। इसके बाद उसके नाम पर फायरिंग, मारपीट और अन्य अपराधों के कई केस दर्ज हो गए। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी रही। करीब डेढ़ साल फरार रहने के बाद, सुभाष ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ऑफिस पहुंचकर आईजी दिनेश एमएन के सामने सरेंडर कर दिया था। यह उसका पहला सरेंडर था, लेकिन अपराध की दुनिया से वह कभी बाहर न आ सका।

गैंगवार का बड़ा चेहरा: क्या होता है आगे? सुभाष बानूड़ा की गिरफ्तारी राजस्थान के गैंगवार को एक नया मोड़ दे सकती है। आनंदपाल गैंग और राजू ठेहट गैंग के बीच पुरानी दुश्मनी जगजाहिर है, और सुभाष जैसे युवा गैंगस्टर इसकी अगली पीढ़ी हैं। पुलिस का कहना है कि सुभाष के कब्जे से अब नए सुराग मिल सकते हैं। उसके वकील का कहना है कि सभी मामलों में सबूतों की कमी है, लेकिन कोर्ट की तारीखें तय हैं। 16 दिसंबर को मनोज ओला फायरिंग मामले की अगली सुनवाई होगी, जहां सुभाष की किस्मत का अगला अध्याय लिखा जाएगा।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.