बांग्लादेश कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व पीएम शेख हसीना को फांसी की सजा, 2024 के छात्र आंदोलन में हत्याओं का मास्टरमाइंड ठहराया

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की हत्या का मास्टरमाइंड मानते हुए दो मामलों में फांसी की सजा सुनाई। हसीना पिछले 15 महीनों से भारत में निर्वासन में हैं, मुकदमा उनके गैर-मौजूदगी में चला। कोर्ट ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।

Nov 17, 2025 - 15:20
बांग्लादेश कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व पीएम शेख हसीना को फांसी की सजा, 2024 के छात्र आंदोलन में हत्याओं का मास्टरमाइंड ठहराया

 ढाका, 17 नवंबर 2025:

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के दोषी करार देते हुए ढाका के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने सोमवार को उन्हें फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला 2024 के घातक छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं से जुड़े मामले में आया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे। हसीना को आंदोलनकारियों पर क्रूर दमन का मास्टरमाइंड बताया गया है। वे अगस्त 2024 से भारत में निर्वासन में रह रही हैं, इसलिए यह मुकदमा उनके खिलाफ अनुपस्थिति में चला।कोर्ट में फैसला सुनाए जाने के दौरान हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। पीड़ित परिवारों ने इसे न्याय की जीत बताया, जबकि हसीना के समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। बांग्लादेश में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, और हसीना की पार्टी अवामी लीग ने फैसले के विरोध में देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले यह फैसला देश की राजनीति में भूचाल ला सकता है।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि: छात्र आंदोलन से सत्ता गिरावट तक 2024 का जुलाई-आगस्त का महीना बांग्लादेश के इतिहास में काला अध्याय बन चुका है। सब कुछ शुरू हुआ सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण की नीति से। यह नीति 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं और उनके वंशजों के लिए थी, लेकिन युवाओं ने इसे पक्षपाती और अव्यावहारिक बताया। जुलाई 2024 में ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो जल्द ही पूरे देश में फैल गया।

प्रदर्शनकारियों की मांग सरल थी: आरक्षण प्रणाली को खत्म करना और नौकरियों में योग्यता आधारित चयन। लेकिन हसीना सरकार ने इसे दबाने के लिए सुरक्षा बलों का कठोर उपयोग किया। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि 25,000 से अधिक घायल हुए। अधिकांश मौतें सुरक्षा बलों की गोलीबारी से हुईं। कोर्ट ने कहा कि हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों से भी फायरिंग की गई, जो हसीना के सीधे आदेश पर था।हसीना ने प्रदर्शनकारियों को "राजाकर" (1971 युद्ध के सहयोगी) जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया, जिससे हिंसा भड़क गई। 5 अगस्त 2024 को भारी विरोध के बीच हसीना ने इस्तीफा दे दिया और एक सैन्य विमान से भारत भाग आईं। उनके बेटे साजीद वाजेद ने रॉयटर्स को बताया कि वे दिल्ली में भारतीय सुरक्षा के संरक्षण में सुरक्षित हैं। हसीना ने फैसले से पहले एक ऑडियो संदेश में समर्थकों से "घबराने" न करने को कहा था।कोर्ट के प्रमुख आरोप और फैसले: हत्याओं का सीधा आदेशआईसीटी-1 ने तीन सदस्यीय बेंच के नेतृत्व में जस्टिस मोहम्मद गोलाम मोर्तुजा मजुमदार ने फैसला सुनाया।

 ट्रिब्यूनल ने हसीना को पांच प्रमुख आरोपों में दोषी ठहराया; हत्या के लिए उकसाव और आदेश ,14 जुलाई 2024 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों को "राजाकर" कहकर हिंसा भड़काना। एक फोन कॉल में सहयोगी शकील से 226 लोगों की हत्या का आदेश। हेलीकॉप्टर/ड्रोन से हमला ,दक्षिण ढाका के मेयर को 18 जुलाई को फोन पर सशस्त्र प्रदर्शनकारियों को मारने का निर्देश। हेलीकॉप्टरों से गोलीबारी। ,छात्रों को फांसी का आदेश ,14 जुलाई की रात एक विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को फोन पर कहा, "मैंने राजाकारों को फांसी दी है, इन्हें भी फांसी दो। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।" चंकहर्पुल हत्याकांड ,5 अगस्त को चंकहर्पुल में 6 प्रदर्शनकारियों की हत्या, हसीना के आदेश पर घातक हथियारों का उपयोग।कुल हत्याएं ,12 विशिष्ट हत्याओं में संलिप्तता, जिसमें छात्रों पर अत्याचार और चिकित्सा सहायता न देना शामिल।

ट्रिब्यूनल ने कहा, "हसीना ने उकसाव, आदेश और निष्क्रियता से मानवता के खिलाफ अपराध किए। यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए उकसाया और छात्रों को समाप्त करने का आदेश दिया।" फोरेंसिक जांच में हसीना के फोन कॉल्स को असली पाया गया, न कि एआई-जनरेटेड।

अन्य आरोपी:पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान: 12 लोगों की हत्या के दोषी, फांसी की सजा। वे भी फरार हैं। पूर्व आईजीपी अब्दुल्ला अल ममून: राज्य गवाह बनने पर 5 साल की कैद। कोर्ट ने कहा कि तीनों आरोपी एक-दूसरे के साथ साजिश रच रहे थे। हसीना की ओर से राज्य-नियुक्त वकील ने बरी होने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने फरारी को अपराध की स्वीकारोक्ति माना।प्रतिक्रियाएं: खुशी, गुस्सा और राजनीतिक तनावपीड़ित परिवार: कोर्ट में तालियां बजाईं। एक भाई, मिर मुग्धो ने कहा, "आज बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण दिन है।" 

जमात-ए-इस्लामी: नेता मिया गोलाम परवार ने इसे न्याय बताया। हसीना पक्ष: बेटे साजीद ने इसे "पूर्व-निर्धारित" और "राजनीतिक" कहा। अवामी लीग ने "कंगारू कोर्ट" करार दिया और हड़ताल बुलाई। 

अंतरराष्ट्रीय: संयुक्त राष्ट्र ने मौतों पर चिंता जताई, लेकिन फैसले पर टिप्पणी नहीं की। भारत ने हसीना की सुरक्षा सुनिश्चित की है। ढाका में विस्फोट और आगजनी की खबरें आईं। पुलिस ने हसीना के परिवार के घर पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की अस्थिरता बढ़ा सकता है, खासकर जब अवामी लीग को चुनावों से वंचित किया गया है।हसीना (78 वर्षीय) ने 2009 से 2024 तक 15 साल तक सत्ता संभाली। उनका परिवार 1975 में हत्या का शिकार हुआ था। अब सवाल यह है कि क्या भारत प्रत्यर्पण पर विचार करेगा? फिलहाल, हसीना ने अपील न करने का संकेत दिया है, जब तक लोकतांत्रिक सरकार न बने।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.