बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा का नया दौर: हसीना विरोधी नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर जानलेवा हमला
बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) के खुलना डिवीजन प्रमुख मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर 22 दिसंबर 2025 को घर में घुसकर गोली मार दी गई। गोली उनके कान को चीरते हुए निकल गई, जिससे दिमाग को नुकसान नहीं पहुंचा और वे खतरे से बाहर हैं। यह हमला छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हालिया हत्या के बाद हुआ, जिसने देश में हिंसा और भारत विरोधी प्रदर्शनों को भड़काया है। फरवरी 2026 के चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है।
बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पतन के बाद से राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का सिलसिला जारी है। सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को दक्षिण-पश्चिमी शहर खुलना में नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाई। यह हमला छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हालिया हत्या के बाद देश में फैले तनाव के बीच हुआ है, जिसने राजनीतिक हिंसा की एक नई लहर को जन्म दिया है।
हमले की घटना और शिकदर की स्थिति बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे द डेली स्टार, प्रोथोम आलो और अन्य) के अनुसार, हमला दोपहर करीब 11:45 बजे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक घर के अंदर या उसके पास हुआ। हमलावरों ने सीधे शिकदर के सिर को निशाना बनाकर फायरिंग की। गोली उनके कान के एक तरफ से प्रवेश कर त्वचा को चीरते हुए दूसरी तरफ से बाहर निकल गई, जिससे दिमाग तक नहीं पहुंची।सोनाडांगा मॉडल पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी अनिमेष मंडल ने बताया कि शुरुआत में शिकदर की हालत गंभीर थी, लेकिन गनीमत रही कि गोली महत्वपूर्ण अंगों को नहीं छू पाई। उन्हें तुरंत खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में सिटी इमेजिंग सेंटर में सीटी स्कैन कराया गया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि शिकदर अब खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर है।
42 वर्षीय मोहम्मद मोतालेब शिकदर NCP के खुलना डिवीजन के प्रमुख हैं और पार्टी के मजदूर विंग 'NCP श्रमिक शक्ति' (या जतिया श्रमिक शक्ति) के केंद्रीय आयोजक भी। हमले के समय वे खुलना में एक डिविजनल मजदूर रैली की तैयारी कर रहे थे। NCP की जॉइंट प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर महमूदा मितु ने फेसबुक पोस्ट में हमले की पुष्टि की और शिकदर को अस्पताल पहुंचाने की जानकारी दी।पुलिस ने हमलावरों की तलाश में कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक मोटिव या आरोपी स्पष्ट नहीं हुए हैं। इलाके में दहशत का माहौल है।
NCP की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ NCP एक नई पार्टी है, जो 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से उभरी है। यह आंदोलन कोटा सिस्टम के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही शेख हसीना सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त 2024 में हसीना का तख्तापलट हुआ और वे भारत भाग गईं। NCP उन छात्रों और कार्यकर्ताओं की पार्टी है जिन्होंने इस क्रांति में अहम भूमिका निभाई। पार्टी अंतरिम सरकार के तहत फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों की तैयारी कर रही है।यह हमला ऐसे समय में हुआ जब NCP से जुड़े एक अन्य प्रमुख नेता की मौत ने देश को हिला दिया है।
शरीफ उस्मान हादी की हत्या और उसके बाद की हिंसा कुछ दिन पहले, 12 दिसंबर 2025 को ढाका में मस्जिद से निकलते समय नकाबपोश हमलावरों ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी पर गोली चलाई। हादी 'इंकलाब मंच' के संस्थापक और प्रवक्ता थे, जो 2024 के आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे। वे भारत-विरोधी बयानों और हसीना की प्रत्यर्पण मांग के लिए जाने जाते थे।गोली लगने के बाद हादी को सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख अखबारों (प्रोथोम आलो और द डेली स्टार) के दफ्तरों में आग लगाई, सड़कें ब्लॉक कीं और भारत विरोधी नारे लगाए। चटगांव में भारतीय सहायक हाई कमीशन पर हमला हुआ। कुछ प्रदर्शनों में कट्टरपंथी तत्वों की भूमिका उजागर हुई, जिन्होंने हसीना की प्रत्यर्पण और भारत से दूरी की मांग की।अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया और जांच का वादा किया, लेकिन हिंसा पर नियंत्रण नहीं हो पाया। संयुक्त राष्ट्र ने भी शांतिपूर्ण जांच की अपील की।
भारत पर प्रभाव और सीमा पर अलर्ट बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता, भारत-विरोधी भावनाएं और अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हमलों की खबरों के बीच भारत सतर्क है। प्रदर्शनों में हसीना की प्रत्यर्पण मांग और भारत विरोधी नारे प्रमुख रहे हैं।इस पृष्ठभूमि में भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने सीमा पर तैयारियां कड़ी कर दी हैं। ईस्टर्न कमांड प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने 19 दिसंबर को त्रिपुरा (बेलोनिया) और मिजोरम (परवा) में बॉर्डर आउटपोस्ट्स का दौरा किया। उन्होंने असम राइफल्स और बीएसएफ के जवानों से बातचीत की, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और उच्च सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। कमांड ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जवानों की व्यावसायिकता की सराहना की।भारत-बांग्लादेश सीमा (कुल 4,096 किमी, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों की हिस्सेदारी प्रमुख) पर घुसपैठ, अपराध और अस्थिरता के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
निष्कर्ष: चुनाव से पहले बढ़ता तनाव शिकदर पर हमला और हादी की हत्या से साफ है कि बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा का खतरा बढ़ गया है। फरवरी 2026 के चुनाव से पहले NCP जैसे नए दल और छात्र नेता निशाने पर हैं। अंतरिम सरकार पर कानून-व्यवस्था बहाल करने का दबाव है, जबकि कट्टरपंथी तत्व और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हिंसा को भड़का रहे हैं। भारत पड़ोसी देश की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता और सीमा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।