शादी की खुशियां मातम में बदलीं बेटी की विदाई से महज 5 दिन पहले ट्रेन ने छीना पिता का साथ.

झुंझुनूं जिले के चिड़ावा में बेटी की शादी से महज 5 दिन पहले पिता सुरेश कुमार सैनी (50) की सैनिक एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर दर्दनाक मौत हो गई। सुबह 4 बजे रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे में उन्हें 100 मीटर तक घसीटा गया। शादी की तैयारियां ठप, परिवार सदमे में। पुलिस ने दुर्घटना मानकर जांच शुरू की, प्रशासन ने 50 हजार रुपये की सहायता दी।

Oct 28, 2025 - 16:24
Oct 28, 2025 - 16:57
शादी की खुशियां मातम में बदलीं बेटी की विदाई से महज 5 दिन पहले ट्रेन ने छीना पिता का साथ.

चिड़ावा (झुंझुनूं), 28 अक्टूबर 2025: एक तरफ घर में बेटी की शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं, मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था, और सारी दुनिया में खुशियों की बहार छाई हुई थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मंगलवार सुबह सूरज की पहली किरणें भी पूरी तरह न फैल पाई थीं कि चिड़ावा के डालमियों की ढाणी में एक ऐसी त्रासदी घटी, जिसने पूरे परिवार को सदमे में डुबो दिया। बेटी की शादी से महज पांच दिन पहले पिता सुरेश कुमार सैनी (50) की सैनिक एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। ट्रेन ने उन्हें करीब 100 मीटर तक घसीटते हुए ले लिया, और जब सब कुछ रुक गया, तो सिर्फ खामोशी और आंसुओं का सैलाब बाकी रह गया।

घटना का पूरा विवरण: सुबह की अंधेरी त्रासदी

चिड़ावा थाना प्रभारी ने बताया कि यह हृदयविदारक हादसा मंगलवार सुबह करीब 4 बजे चिड़ावा-सिंघाना रोड के पास रेलवे ट्रैक पर हुआ। डालमियों की ढाणी के निवासी सुरेश सैनी रोजाना की तरह सुबह जल्दी उठे थे। वे शायद शादी की तैयारियों के सिलसिले में कहीं जा रहे थे या फिर अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले थे—यह तो अब कभी स्पष्ट नहीं हो पाएगा। अचानक सैनिक एक्सप्रेस ट्रेन की तेज रफ्तार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। ट्रेन की चपेट में आने के बाद सुरेश जी को करीब 100 मीटर तक घसीट लिया गया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।स्थानीय लोगों ने हादसे की सूचना मिलते ही चिड़ावा पुलिस और रेलवे अधिकारियों को दी। जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) की टीम ने शव को कब्जे में ले लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे दुर्घटना करार दिया है, लेकिन परिवार के बयानों के आधार पर आगे की तफ्तीश जारी है। ट्रैक पर फाटक के पास होने के कारण राहगीरों की आवाजाही ज्यादा रहती है, और सुबह के अंधेरे में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। सुरेश जी का शव ट्रैक पर ही पड़ा मिला, जिसकी दृश्यावली देखने वालों की रूह कांप उठी।

परिवार का दर्द: शादी की बहार पर मातम का पहरा

सुरेश कुमार सैनी एक साधारण लेकिन मेहनती इंसान थे। डालमियों की ढाणी में वे अपने परिवार के सहारे थे—पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा। बड़ी बेटी की शादी की तैयारियां घर में चरम पर थीं। नई-नई साड़ियां, आभूषण, मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था—सब कुछ तय हो चुका था। शादी 2 नवंबर को होने वाली थी, और सुरेश जी खुद अपनी लाड़ली बेटी को विदा करने का सपना देख रहे थे। लेकिन यह हादसा आया और सब कुछ उजड़ गया।परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। सुरेश जी की पत्नी का रोना देखकर पूरा मोहल्ला सिसकियां ले रहा है। बेटी, जो अब बार-बार कह रही है, "पापा, आप तो शादी देखने थे न..." छोटी बहन और भाई भी सदमे में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि सुरेश जी बेहद मिलनसार और जिम्मेदार पिता थे। वे अक्सर बेटी की शादी के लिए दोस्तों से बातें करते और खुशी से चमकते चेहरे के साथ घर लौटते। अब शादी की तैयारियां ठप हो चुकी हैं। परिवार ने फैसला किया है कि अंतिम संस्कार के बाद ही शादी के बारे में सोचा जाएगा, लेकिन सारी खुशियां काले कपड़े में लिपट चुकी हैं। 

स्थानीय प्रभाव और प्रशासन की प्रतिक्रिया

यह घटना चिड़ावा क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर कर रही है। खेतड़ी रोड और सिंघाना रोड के पास रेलवे फाटक अक्सर व्यस्त रहते हैं, खासकर सुबह-शाम के समय। हाल ही में ही चिड़ावा में एक बुजुर्ग की मेंटेनेंस कार ट्रेन से टकराने की घटना हुई थी, जो अब सुरेश जी के हादसे से जुड़ गई है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि फाटकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, चेतावनी संकेत मजबूत हों और रेलवे पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए।झुंझुनूं जिला कलेक्टर ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया और शादी की तैयारियों में आर्थिक मदद का भरोसा दिया। चिड़ावा विधायक ने भी परिवार से मुलाकात की और कहा, "यह पूरे क्षेत्र का दुख है। हम सुरक्षा के हर उपाय करेंगे ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।" पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिसमें ट्रेन की स्पीड और फाटक की स्थिति की पड़ताल शामिल है। 

संदेश: सावधानी ही सुरक्षा का आधार

यह हादसा हमें याद दिलाता है कि जिंदगी कितनी नाजुक है। शादी जैसी खुशी के पल भी एक पल में मातम में बदल सकते हैं। रेलवे ट्रैक पार करते समय हमेशा सतर्क रहें—खासकर अंधेरे में। फाटक बंद होने पर इंतजार करें, और तेज रफ्तार वाली ट्रेनों से दूरी बनाए रखें। सुरेश जी की यादें परिवार के साथ रहेंगी, लेकिन यह दर्द हमें सबक देगा कि सावधानी से कितने घर उजड़ने से बच सकते हैं।